यात्री शेड पर हुआ कब्जा, बारिश में भीग रहे यात्री

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स्टेशन रोड स्थित यात्री शेड पर बना है रेहड़ी-ठेली का कब्जा
वर्षा काल में सड़क पर खड़े रहकर वाहनों का इंतजार कर रहे यात्री
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : भले ही सरकारी सिस्टम शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के दावे कर रहा हो। लेकिन, हकीकत यह है कि बाजार चौकी से चंद कदम की दूरी पर स्थित यात्री शेड में हुआ रेहड़ी-ठेली का कब्जा आज तक सिस्टम को नजर नहीं आया। नतीजा, यात्रियों को बीच सड़क पर खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। जबकि, वर्तमान में वर्षा का दौर भी चल रहा है। ऐसे में यात्री वर्षा से बचने के लिए आसपास की दुकानों के बाहर लगे तिरपालों का सहारा ले रहे हैं।
कोटद्वार को गढ़वाल का द्वार कहा जाता है। यही कारण है कि यहां से मैदान व पहाड़ जाने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों यात्री पहुंचते हैं। लेकिन, इन यात्रियों के लिए बस स्टेशन में किसी भी तरह की व्यवस्था नजर नहीं आ रही। हालत यह है कि स्टेशन में आज भी यात्रियों को सिर ढकने के लिए एक शेड तक नहीं मिल पाया है। वर्षा व धूप से बचने के लिए यात्री दुकानों के आसपास बैठे रहते हैं। हालांकि, बस स्टेशन से कुछ दूर बाजार चौकी के समीप यात्रियों की सुविधा के लिए वर्ष 1976 में एक यात्री शेड का निर्माण करवाया गया था। लेकिन, यह यात्री शेड भी रेहड़ी-ठेली वालों के अतिक्रमण की जद में है। अतिक्रमण के कारण सड़क पर घूमने वाले यात्रियों को यह यात्री शेड नजर नहीं आता। जबकि, यात्री शेड से सौ मीटर आगे बाजार पुलिस चौकी भी है। लेकिन, पुलिस ने भी कभी यात्री शेड को अतिक्रमण मुक्त करने की सुध नहीं ली। जबकि, स्थानीय लोग कई बार सरकारी सिस्टम में स्टेशन में बैंच निर्माण व यात्री शेड बनवाने की गुहार लगा चुके हैं।

पानी को भी भटक रहे यात्री
कोटद्वार स्टेशन रोड पर यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। नगर निगम ने शहर के मुख्य चौराहों पर पांच से आधिक वाटर कूलर लगाए लेकिन, उन्हें भी यात्रियों के लिए स्टेशन रोड पर वाटर कूलर लगाने की याद नहीं आई। नतीजा, यात्रियों को जेब ढीली कर दुकान से पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। यही नहीं स्टेशन में शौचालय की भी कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी बच्चों व बुजुर्गों को होती है।

खतरे में यात्री व कर्मचारी
रोडवेज डिपो का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच चुका है। हल्की वर्षा होते ही भवन की छत टपकने लगती है। ऐसे में यात्री व भवन में कार्य कर रहे कर्मचारियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। वर्षाकाल में भवन ढहने से कब बड़ा हादसा हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। हालांकि, पुराने भवन के समीप ही रोडवेज डिपो के नए भवन का निर्माण भी करवाया गया है। लेकिन, अब तक कार्यालयों को नए भवन में शिफ्ट नहीं किया गया है।

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