फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र से एमबीबीएस में दाखिला, प्रवेश निरस्त

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देहरादून। एचएनबी उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस दाखिलों से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले एक छात्र का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी देहरादून की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। मामला एक छात्र से जुड़ा है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के आधार पर हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट हासिल की थी। जांच के दौरान प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए जाने पर डीएम देहरादून की रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने छात्र का दाखिला रद्द कर दिया।
कांवली रोड के पते पर बनाया प्रमाण पत्र
मामले में जांच के दौरान यह बात सामने आई कि छात्र ने देहरादून के कांवली रोड स्थित पते को आधार बनाकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कराया था। जांच में छात्र के बागपत, उत्तर प्रदेश का निवासी होने की बात भी सामने आई है। मामले में वसंत विहार थाने में पटवारी की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। एसआईटी इस प्रकरण की जांच कर रही है। जांच में अब तक छात्र के बागपत का निवासी होने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। प्रमाण पत्र में दर्शाए गए पते और वास्तविक निवास को लेकर भी विस्तृत जांच जारी है। मामले में गिरफ्तारी की कार्रवाई भी संभावित बताई गई है।
778 प्रमाण पत्रों की जांच
के दायरे में
एमबीबीएस दाखिलों में सामने आए इन मामलों के बाद एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से जुड़े 778 प्रमाण पत्रों की जांच के लिए संबंधित जिलों को पत्र भेजे हैं। विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अब तक 20 संदिग्ध मामलों की जानकारी सामने आ चुकी है। इनमें चार मामले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से जुड़े बताए गए हैं।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार, एमबीबीएस दाखिलों से जुड़े 778 प्रमाण पत्रों की जांच के लिए संबंधित जिलों को भेजे गए हैं। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है और प्रमाण पत्रों की जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।
370 संदिग्ध दाखिलों की
उच्चस्तरीय जांच की मांग
दूसरी ओर एमबीबीएस दाखिलों में सामने आए 370 संदिग्ध मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा और कुछ अभिभावकों ने पत्रकार वार्ता कर हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की है।
प्रदीप बहुगुणा का कहना है कि 370 संदिग्ध मामलों की अब तक जांच नहीं हुई है। उन्होंने फर्जी दाखिलों की एसआईटी जांच कराकर सभी संदिग्ध मामलों को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।
स्थायी निवास के बिना स्टेट कोटा में दाखिले का आरोप
मामले को लेकर पूर्व विधायक बहुगुणा ने आरोप लगाया कि शासनादेश की गलत व्याख्या कर उत्तराखंड से 10वीं-12वीं पास करने वाले अभ्यर्थियों को स्थायी निवास के बिना ही स्टेट कोटा में दाखिला देने की प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
कार्मिक विभाग के सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी राजेंद्र प्रसाद जोशी ने भी कहा कि संबंधित नियम केवल समूह ह्यगह्ण के लिए लागू होता है। ऐसे में प्रमाण पत्रों की व्यवस्था को स्पष्ट करने और उसकी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग उठ रही है।
प्रमाण पत्र व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
अभिभावक सत्यप्रकाश चौहान ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने में सात से आठ महीने तक लग जाते हैं और कई स्तरों पर जांच होती है। इसके बावजूद कथित फर्जीवाड़े के मामले सामने आना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिले पाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए तथा प्रशासन और मेडिकल यूनिवर्सिटी की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

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