रुड़की। धनोरी स्थित अमृत लॉ कॉलेज परिसर में सोमवार दोपहर उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब भवन की दूसरी मंजिल पर बने बाथरूम की ओर का लेंटर अचानक भरभराकर गिर गया। लेंटर के साथ दीवारें भी ढह गईं और वहां मौजूद पीएसी का एक जवान मलबे में दब गया। हादसे में जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, पिरान कलियर मेले की ड्यूटी के लिए पीएसी की एक प्लाटून को अमृत लॉ कॉलेज परिसर में ठहराया गया था। सोमवार दोपहर करीब एक बजे अधिकांश जवान अपनी-अपनी ड्यूटी पर गए हुए थे। इसी दौरान पीएसी जवान आदिल दूसरी मंजिल पर बने बाथरूम की ओर गया। वह वहां पहुंचा ही था कि अचानक भवन का एक हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा। लेंटर और दीवारों का मलबा सीधे जवान के ऊपर गिर गया।
कोतवाल के नेतृत्व में शुरू हुआ रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही पिरान कलियर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। कोतवाल कमल मोहन भंडारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों और पीएसी जवानों की मदद से तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
जवान के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते शुरुआत में हाथों से मलबा हटाकर तलाश की गई। जब इससे सफलता नहीं मिली तो मौके पर जेसीबी मशीन बुलाई गई। इस बीच एसडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस, एसडीआरएफ, पीएसी जवानों और स्थानीय लोगों की संयुक्त कोशिशों के बाद काफी मशक्कत से जवान आदिल को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन हालत गंभीर बताई गई।
भूमानंद अस्पताल से एम्स
ऋषिकेश रेफर
मलबे से बाहर निकालने के तुरंत बाद घायल जवान को उपचार के लिए भूमानंद अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। फिलहाल जवान का एम्स ऋषिकेश में उपचार चल रहा है।
1980 के दशक में बनी बताई जा रही है इमारत
अमृत लॉ कॉलेज एक निजी लॉ कॉलेज है और पिरान कलियर मेले के मद्देनजर पीएसी की प्लाटून को परिसर में ठहराया गया था।
जिस हिस्से में हादसा हुआ, वह भवन काफी पुराना बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित बिल्डिंग का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था।
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। भवन का हिस्सा अचानक क्यों गिरा, इसकी जांच की जा रही है। भवन की उम्र, निर्माण की स्थिति और वर्तमान में उसकी मजबूती भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।