देश में जल्द आएंगे 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट, आरबीआई शुरू करेगा फील्ड ट्रायल

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-केंद्र सरकार ने एक-एक अरब नोटों के परीक्षण को दी मंजूरी; सफल रहा प्रयोग तो नियमित रूप से जारी होंगे पॉलीमर नोट
नई दिल्ली ,11 अगस्त (आरएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही देश में 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों का क्षेत्रीय परीक्षण शुरू करेगा। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। दोनों मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया जाएगा।
पॉलीमर नोटों की शुरुआत को देश की मुद्रा व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक इस्तेमाल योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। हालांकि, योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और परीक्षण शुरू होने की सटीक तारीख तथा इससे होने वाले खर्च का अंतिम अनुमान अभी तय नहीं किया गया है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षण के दौरान जारी किए जाने वाले पॉलीमर नोट मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही प्रचलन में रहेंगे। यानी नए नोट आने के बाद पुराने कागजी नोटों को तत्काल चलन से बाहर नहीं किया जाएगा।
यदि क्षेत्रीय परीक्षण सफल रहता है तो 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों को नियमित रूप से जारी करने पर विचार किया जाएगा। पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं और उनमें कुछ सुरक्षा विशेषताएं जोड़ना भी अपेक्षाकृत आसान होता है।
वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई के संबंध में भी संसद को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खुदरा महंगाई लगातार नियंत्रण में बनी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, औसत खुदरा मुद्रास्फीति वर्ष 2023-24 में 5.4 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर 4.6 प्रतिशत और 2025-26 में और कम होकर 2.1 प्रतिशत रह गई।
हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा और जिंसों की कीमतों में तेजी, सब्जियों की मौसमी महंगाई और अल नीनो की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई। इसके बावजूद यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की जानकारी दी गई है। वस्तु एवं सेवा कर परिषद की 56वीं बैठक में दो प्रमुख कर दरों वाली व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत एक मानक दर 18 प्रतिशत और एक रियायती दर 5 प्रतिशत रखी गई है। वहीं, चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष उच्च दर निर्धारित की गई है, जिसमें पुराना क्षतिपूर्ति उपकर भी शामिल है।
इस बदलाव के तहत कई वस्तुओं पर कर की दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तथा 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य की गई है। सरकार का दावा है कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त कर बोझ डाले बिना कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में राहत मिल सकती है।
घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बजट 2026-27 में कच्चे पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क में भी कमी की गई है।
इसके अलावा मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। सरकार के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य उत्पादन लागत और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है।
सरकार ने मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए आयकर व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को आयकर से पूरी तरह मुक्त किया गया है। वेतनभोगी करदाताओं के लिए मानक कटौती को जोड़ने के बाद यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक हो जाती है।

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