जयन्त प्रतिनिधि।
लैंसडौन : छावनी परिषद लैंसडौन की बोर्ड बैठक में पर्यटन नगरी में ग्रीन सेस टैक्स लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। केंट का मानना है कि वर्षभर विशेष कर पर्यटन सीजन के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों के आगमन से नगर में ठोस कचरे का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रीन सेस के माध्यम से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने में किया जाएगा।
छावनी परिषद ने ग्रीन सेस को केवल राजस्व का माध्यम ना बताते हुए कहा कि इसे स्वच्छता जागरूकता अभियान से भी जोड़ा जाएगा। इसी सोच के तहत शुल्क जमा करने वाले प्रत्येक पर्यटक को एक जूट का बैग उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि वह अपने आप उत्पन्न होने वाले कचरे को उसमें रख सके और डस्टबिन में डाल सके। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों जिनके पास चौपाइयां वहां हैं उनसे 100 और दो पहिया वाहन वालों से 50 ग्रीन सेस शुल्क के रूप में वसूला जाएगा। इस प्रस्ताव को छावनी बोर्ड की बैठक में अंतिम मंजूरी दी गई है। वहीं छावनी अध्यक्ष ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी का कहना है। कि ग्रीन सेस का मकसद सिर्फ राजस्व की प्राप्ति करना नहीं है। अपितु पर्यटकों को स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। हमारा लक्ष्य लैंसडौन को प्लास्टिक मुक्त करना है। छावनी बोर्ड की बैठक में जहां से टैक्स को अंतिम मंजूरी दी गई। वहीं छावनी शहर में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता हितेश शर्मा का कहना है कि पर्यटकों के द्वारा लैंसडौन में कई प्रकार के शुल्क जैसे पार्किंग शुल्क, प्रवेश शुल्क आदि दिए जा रहे हैं। पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए ना कि शुल्क बढ़ाने पर। उन्होंने कहा कि ग्रीन सेस शुल्क लागू होने से पर्यटकों पर आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।