जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कलालघाटी स्थित ओंकारेश्वर एवं दशहरा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के छठें दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा, कैकेयी संवाद और राम वनवास की लीलाओं का मंचन किया गया। श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

रामलीला में दशरथ दरबार में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा होते ही पूरी अयोध्या उत्सव में डूब गई। चारों ओर प्रसन्नता और उल्लास का माहौल था। राजतिलक की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन कैकेयी के कोप भवन में जाने और राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने के प्रसंग ने माहौल बदल दिया। कैकेयी संवाद के बाद श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने की लीला का मार्मिक मंचन किया गया। श्रीराम के वन जाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, श्री बाल रामलीला के मंच पर आयोजित रामलीला के सातवें दिन का शुभारंभ श्री बालाजी मंदिर के महंत दिनेश ऐलाबादी, राजीव गुप्ता, अरविंद बंसल और हरीश बेहरानी ने किया। सातवें दिन की लीला में राजा दशरथ की मृत्यु के बाद भरत और लक्ष्मण के विलाप का भावपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया गया। पिता की मृत्यु और श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने पर भरत कैकेयी पर क्रोधित हो उठते हैं। इसके बाद अयोध्यावासी भगवान श्रीराम को वापस लाने के लिए वन की ओर जाते हैं। हालांकि, भगवान श्रीराम अयोध्या लौटने से इनकार कर देते हैं और पिता को दिए वचन का पालन करने की बात पर अडिग रहते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के पंचवटी में प्रवेश करने के दृश्यों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। इस मौके पर ओम प्रकाश भाटिया, डॉ. घनानंद शर्मा, सरदार महेंद्र सिंह, नितिन गुप्ता, विनय भाटिया, सुरेश गोयल, मीना सेमवाल और जगदीश फुलारा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।