देहरादून। शनि जयंती इस साल 16 मई को मनाई जाएगी। शनि जयंती पर इस वर्ष एक बहुत ही दुर्लभ और अद्भुत ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। यह योग 500 साल बाद बन रहा है। जिसे ज्योतिषी गोल्डन योग भी बता रहे हैं। 16 मई को शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है। जिससे शनेश्चरी अमावस्या का विशेष योग बन रहा है। शनि जयंती पर ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई की देर रात 1:30 बजे समाप्त होगी। शनि देव की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 16 मई शाम 7:05 बजे से रात 8:23 बजे तक माना गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ.सुशांतराज ने बताया कि शनि जयंती पर इस साल शश महापुरूष योग, केदार, बुद्धदित्य और सौभाग्य योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। शनि अपनी ही कुंभ राशि में मार्गी अवस्था में विराजमान होकर ‘शश राजयोग’ बना रहे हैं। यह संयोग 500 साल बाद पहली बार इतनी प्रबल स्थिति में आ रहा है। जो आर्थिक समृद्धि, कॅरियर में तरक्की और मानसिक शांति लेकर आएगा। कुंभ राशि शनि की अपनी राशि होने के कारण इस राशि वालों पर विशेष कृपा रहेगी। डॉ.सुशांत राज के अनुसार शनि जयंती पर ‘ऊं शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें, पीपल के पेड़ पर दीपक जलाकर जल चढ़ाएं और विधि पूर्वक पूजा करें।