उत्तराखंड

राष्ट्रीय सर्वेक्षण दिवस पर सर्वे के ऐतिहासिक पड़ाव किए याद

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देहरादून। सर्वे अफ इंडिया हाथीबड़कला में राष्ट्रीय सर्वेक्षण दिवस पर हुई गोष्ठी में भारतीय सर्वेक्षण के ऐतिहासिक पड़ावों को याद किया गया। भारत के महासर्वेक्षक का कार्यालय सभागार में हुई गोष्ठी में अपर महासर्वेक्षक (तकनीकी) ब्रिगेडियर बी सरीन चंदर ने बताया कि 10 अप्रैल 1802 को थियोडोलाइट यंत्र का उपयोग करके वैज्ञानिक एवं खगोलीय गणनाओं के प्रेक्षण पर आधारित ग्रेट त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण की आधार रेखा को मापने का काम सेंट थमस चेन्नई से शुरू हुआ था। सन 1841 तक इस सर्वे कार्य को लगातार जारी रखते हुए मसूरी के विनोग हिल तक करीब 2400 किमी लंबी ग्रेट मेरोडिनल आर्क(बृहत यामोत्तर चाप) को मापा गया। इसे विश्व में सबसे लंबी ग्रेट मेरोडिनल आर्क भी कहा जाता है। इसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग के कर्मठ अधिकारियों, सहयोगी कर्मचारियों, महान भारतीय सर्वेक्षकों, नक्षत्र विज्ञानी एवं गणितज्ञों द्वारा सफलता पूर्वक माप कर इतिहास रचा गया था। इसी प्रकार विश्व के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट की समुद्र सतह से ऊंचाई के प्रेक्षण आंकलन एवं गणना का कार्य भी (1841- 54) भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रमाणित तौर पर किया गया। जो आज के आधुनिक यंत्रों एवं डिजिटल गणनाओं के बेहद करीब है। उन्होंने भारतीय सर्वेक्षण विभाग के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों व उनके परिवार को सर्वेक्षण दिवस की शुभकामना दी। उन्होंने मौजूदा कर्मचारियों से पूर्व के कार्यों से प्रेरणा लेकर विभाग को जियो-स्पेशियल जगत के शिखर तक पहुंचाने का आह्वान किया। समारोह के विशेष अतिथि ब्रिगेडियर केजी बहल अपर महासर्वेक्षक (सेवानिवृत्त), कर्नल सुमित द्विवेदी निदेशक राष्ट्रीय भू- स्थानिक आंकड़ा केंद्र ने भारतीय उपमहाद्वीप के करीब 1382 उन द्वीपों का संकलित ब्यौरा दिया, जिसे सामरिक, आर्थिक व जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मौके पर प्रदीप सिंह उप महासर्वेक्षक तकनीकी ने समेत भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सभी निदेशालयों के निदेशकों एवं महासर्वेक्षक कार्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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