रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने की मांग पर केंद्र सरकार व राज्यों को नोटिस

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नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों सहित सभी घुसपैठियों की पहचान करके एक वर्ष के भीतर उन्हें वापस भेजने की मांग पर केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को रोहिंग्याओं के बारे में पहले से लंबित याचिका के साथ सुनवाई के लिए संलग्न करने का आदेश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को ये आदेश भाजपा नेता और वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के बाद दिए। यह याचिका 2017 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कोर्ट के समक्ष याचिका का जिक्र करते हुए रोहिंग्याओं सहित सभी घुसपैठियों को एक वर्ष के भीतर वापस भेजने की मांग की। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद याचिका में प्रतिवादी बनाए गए केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किए।
याचिका में घुसपैठ की समस्या के मूल में जाने और फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करने वालों पर भी नकेल कसने की बात कही गई है। इसमें मांग है कि कोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों को आदेश दे कि वे ऐसे सभी ट्रैवेल एजेंटों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों की पहचान करे जो गैरकानूनी रूप से देश में घुस आए लोगों के पैन कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र बनवाने में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मदद कर रहे हैं।याचिका में कहा गया है कि घुसपैठ से न सिर्फ देश के सीमांत जिलों में जनसांख्यिकी संरचना बिगड़ने का बल्कि देश की सुरक्षा और अखंडता को भी गंभीर खतरा है।
याचिका में बांग्लादेश और म्यांमार से हो रही घुसपैठ को देश की शांति के लिए भी खतरा बताया गया है। कहा है कि दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में आतंकी पृष्ठभूमि के रोहिंग्या चिन्हित किए गए हैं जो भारत की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। भारत एक बड़ी जनसंख्या वाला देश है। गैरकानूनी रूप से रह रहे लोगों को राष्ट्रीय स्त्रोत से सुविधाएं देने से भारतीयों के हित प्रभावित होते हैं। भारतीयों के नौकरी, रियायती आवास, चिकित्सा और शिक्षा आदि के हिस्से में कटौती होती है। केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे फारेनर्स एक्ट, 1946 के तहत घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए ठोस कदम उठाएं।

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