सरकार ने हंगामे के लिए विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार, राजनाथ सिंह ने घटना को बताया दुखद और शर्मनाक

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नई दिल्ली। राज्यसभा में उपसभापति के साथ हुए दुव्र्यवहार के लिए सरकार ने पूरी तरह से विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्यसभा में जो कुछ हुआ है संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं हुआ है। उन्होंने इसे दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया। उनके अनुसार विपक्षी सासंदों के व्यवहार को संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला रहा है। जबकि लोकतंत्र में विपक्ष के लिए भी संसदीय परंपराओं के पालन की अपेक्षा होती है।
राजनाथ सिंह ने राज्यसभा से पारित विधेयकों को किसान और कृषि जगत के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसे लेकर आम किसानों के बीच गलतफहमी पैदा करके निहित स्वार्थ साधने की कोशिश की जा रही है, जो स्वस्थ्य राजनीतिक परंपराओं के लिए अनुकूल नहीं है।
उन्होंने कहा कि उपसभापति के साथ जो दुव्यर्हार हुआ है, उसे पूरे देश ने देखा है। इस दौरान उन्होंने उपसभापति के लंबे मर्यादित सार्वजनिक जीवन का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि सभापति के आसन पर चढ़ जाना, रूल बुक्स और अन्य कागजात को फाड़ना, माइक को उखाड़ने जैसी घटना संसदीय इतिहास में पहली बार हुई है। इसके पहले ऐसी घटना लोकसभा और राज्यसभा कहीं भी नहीं हुई थी। राजनाथ सिंह ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि श्जब लोकतंत्र की मर्यादाएं टूटती है तो लोकतंत्र भी शर्मसार होता है।
राजनाथ बोले, मैं सचमुच में हुआ आहत
उपसभापति के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिये जाने के बारे में पूछे जाने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस संबंध में सभापति जो भी फैसला करना चाहेंगे, करेंगे। यह सभापति का विशेषाधिकार है। विधेयक पर मत विभाजन की मांग स्वीकार नहीं किये जाने के विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनके हिसाब से उनकी बात नहीं मानी गई। तो क्या उस व्यक्ति को हिंसक होना चाहिए, उपसभापति के चेयर पर चढ़ जाना चाहिए। मैं सचमुच में आहत हुआ हूं।
वहीं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार जिस समय मत विभाजन की मांग की जा रही थी, उस समय भी विपक्षी सांसद आसन के सामने हंगामा कर रहे थे। जबकि उपसभापति खुद मत विभाजन के लिए उन्हें सीट पर जाने के लिए कह रहे थे। सीट पर जाने के बजाय विपक्षी सांसद हंगामा करते रहे। एमएसपी से कम कीमत पर खरीदने पर सजा का प्रावधान विधेयक में रखे जाने के बारे में पूटे जाने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह का प्रावधान किसी भी कानून में नहीं रहा है। जबकि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना था कि एमएसपी कोई कानून नहीं है और यह प्रशासनिक आदेश है।

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