श्रीराम-भरत मिलाप देख भावुक हुए श्रद्धालु, झंडाचौक में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : रामलीला कमेटी मालवीय उद्यान की ओर से झंडाचौक में राम-भरत मिलाप का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के मिलन का भावपूर्ण दृश्य देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। दोनों भाईयों के गले मिलते ही पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।


मंचन के दौरान दिखाया गया कि भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने के बाद उनके छोटे भाई भरत ने राजगद्दी स्वीकार नहीं की। उन्होंने श्रीराम की खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य का संचालन किया। स्वयं भरत ने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग कर तपस्वी का जीवन व्यतीत किया और अपने बड़े भाई की वापसी का इंतजार करते रहे। वनवास की अवधि पूरी होने पर भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर भरत उनसे मिलने पहुंचे। लंबे इंतजार के बाद दोनों भाईयों का मिलन हुआ तो प्रेम, त्याग और समर्पण का यह प्रसंग जीवंत हो उठा। रामलीला के कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्रीराम और भरत के गले मिलने के दृश्य पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान श्रीराम के जयकारों से झंडाचौक का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने रामलीला के कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

राम-भरत मिलाप ने दिया भाईचारे का संदेश
राम-भरत मिलाप का प्रसंग भाईचारे, त्याग, मर्यादा और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है। भरत ने राजपाट का मोह त्यागकर जिस तरह अपने बड़े भाई के प्रति समर्पण दिखाया, वह समाज को रिश्तों की गरिमा बनाए रखने की प्रेरणा देता है। रामलीला कमेटी के इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

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