समाज को वनों के प्रति अपनी सोच बदलने की आवश्यकता

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पिरूल बना ग्रामीणों की आर्थिकी का जरिया
जयन्त प्रतिनिधि।
सतपुली : द हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वनाग्नि शमन एवं रोकथाम परियोजना के अंतर्गत चयनित वॉलंटियर फायर फाइटर्स, हंस वन अग्नि प्रबंधन समितियों एवं समिति सदस्यों द्वारा वन विभाग के निर्देशन में चीड़ (पिरूल) की पत्तियों के एकत्रीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस पहल से एक ओर ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगलों में एकत्रित अतिरिक्त ज्वलनशील पदार्थ (फ्यूल एवं बायोमास) को कम कर वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण करने में भी सहायता मिल रही है। यह कार्य ग्रामीणों की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
वर्तमान में विकासखंड जयहरीखाल की ग्राम पंचायतों पल्ली गांव, ओड़ल, खुन्डोली, कोटा मल्ला, कांडई, चिनवाड़ी, टसीला, पोखरी, पाली मल्ली एवं पाली तल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में समिति सदस्यों एवं ग्रामवासियों द्वारा पिरूल संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। अब तक लगभग 76.265 टन (76,265 किलोग्राम) पिरूल का संग्रहण किया जा चुका है, जिसे एम.एस. एग्रो वेस्ट मैनेजमेंट, सेलाकुई के सतपुली स्थित डंपिंग क्षेत्र में भंडारित किया जा रहा है। द हंस फाउंडेशन के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक पुरुषोत्तम प्रसाद थपलियाल ने महिलाओं को संबोधित करते हुए बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “पिरूल लाओ, पैसे पाओ” योजना महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ बनाने तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस अवसर पर परियोजना के एस.एम.ई. संजय बजवाल ने कहा कि समाज को वनों के प्रति अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। कहा कि वन न केवल हमारी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, बल्कि आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए वनों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। द हंस फाउंडेशन की ओर से रेखा देवी, ममता देवी, रुचि देवी, वन विभाग के वन क्षेत्राधिकारी श्री बहुगुणा, कुलदीप, वन दरोगा रमेश गुसाईं, राकेश बेदवाल की निगरानी एवं मार्गदर्शन में सफलता पूर्वक संचालित किया जा रहा है।

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