कवि सम्मेलन में गूंजा पहाड़ का दर्द, हालात पर कसे तीखे तंज

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : जय कंडोलिया ग्रीष्म महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को संस्कृति भवन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए पौड़ी के मौजूदा हालात पर तीखे तंज कसे और कई ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कवि सम्मेलन में पहाड़ का दर्द, जनसरोकार और व्यवस्था की खामियां कविता और व्यंग्य के माध्यम से मंच पर खुलकर सामने आईं। काव्य पाठ के दौरान कवियों ने पौड़ी से लगातार हो रहे पलायन, बाघ के बढ़ते हमलों, लोक निर्माण विभाग की बदहाल सड़कों और गड्ढों पर जमकर व्यंग्य किया। साथ ही पहाड़ की बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को भी अपनी कविताओं में बखूबी पिरोया। सम्मेलन में राष्ट्रीय कवि नीरज नैथानी, हरीश जुयाल ‘कुटज’, डॉ. कुसुम भट्ट, मनोज रावत ‘अंजुल’, गणेश खुगशाल ‘गणि’, मनोज साहनी, धर्मेंद्र उनियाल, परमेंद्र नेगी और बीरेंद्र खंकरियाल ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि विजय कप्रवाण ने किया। कवि सम्मेलन में मौजूद श्रोताओं ने तालियों और वाह-वाह के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया। देर शाम तक कविता, व्यंग्य और पहाड़ के दर्द की गूंज संस्कृति भवन में सुनाई देती रही।

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