श्रद्धालुओं की सहभागिता से ‘कैरी मी बैक’ अभियान बना जनआंदोलन

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वैज्ञानिक निस्तारण हेतु 2 टन कचरा धाम से लाया गया नीचे
जयन्त प्रतिनिधि।
रूद्रप्रयाग : हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण एवं श्री केदारनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर और कचरा-मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग द्वारा संचालित ‘कैरी मी बैक’ अभियान को श्रद्धालुओं का व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है। नगर पंचायत केदारनाथ, हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन एवं सुलभ इंटरनेशनल की संयुक्त पहल से संचालित इस अभिनव अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 2 टन कचरा श्रद्धालुओं एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से धाम क्षेत्र से नीचे लाया जा चुका है, जो पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी आधारित स्वच्छता प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
अभियान के तहत श्रद्धालुओं को अपने साथ लाए गए प्लास्टिक, पानी की खाली बोतलों, खाद्य सामग्री के रैपर तथा अन्य गैर-जैविक अपशिष्ट को धाम में न छोड़कर वापस नीचे लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यात्रा मार्ग एवं श्री केदारनाथ धाम में तैनात कार्मिकों तथा स्वयं सेवकों द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाकर यात्रियों को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल सिंह रावत ने कहा कि केदारनाथ धाम की स्वच्छता एवं हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कहा कि ‘कैरी मी बैक’ अभियान में श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी अत्यंत उत्साहजनक है तथा लगभग 2 टन कचरे को धाम से नीचे लाया जाना इस बात का प्रमाण है कि जनसहयोग से बड़े और सकारात्मक बदलाव संभव हैं। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। कहा कि ‘कैरी मी बैक’ अभियान ने लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जनभागीदारी आधारित कचरा प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जिला प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार की पर्यावरण हितैषी पहलों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा। जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे श्री केदारनाथ धाम की पवित्रता एवं हिमालय की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनें तथा अपने साथ उत्पन्न होने वाले कचरे को वापस नीचे गौरीकुंड लाकर इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।

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