-मुख्यालय के ताले बदले, नए पोस्टर लगाए; चुनाव आयोग में भी संगठन और चुनाव चिह्न पर दावा
कोलकाता, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक संघर्ष के बीच शनिवार देर रात बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। बागी नेताओं ने कार्यालय के ताले बदल दिए और भवन पर नए पोस्टर लगा दिए, जिनमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर शामिल नहीं थी। साथ ही वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष घोषित करते हुए उनके नाम के पोस्टर भी लगाए गए।
मुख्यालय पर कब्जे के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने अपने समर्थकों और नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है और अब पार्टी की गतिविधियों का संचालन इसी मुख्यालय से किया जाएगा।
इससे पहले बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा प्रस्तुत किया था। इस मामले में चुनाव आयोग ने छह जुलाई को बागी गुट को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी आयोग के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी शुरू कर दी है।
उधर, मुख्यालय पर हुए घटनाक्रम के बीच ममता गुट के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष भी पार्टी कार्यालय पहुंचे, लेकिन मुख्य द्वार पर ताला लगे होने के कारण वे अंदर प्रवेश नहीं कर सके। उन्होंने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि किसी विधायक या पार्टी नेता को कार्यालय आने की आवश्यकता है तो यह उसका अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यालय पर ताले क्यों लगाए गए हैं।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि जब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे थे और उन्हें समर्थन की आवश्यकता थी, तब बागी गुट के नेता उनके साथ नहीं खड़े हुए। उन्होंने कहा कि अब कुछ लोग किसी और के इशारे पर काम कर रहे हैं और पार्टी में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस में बढ़ते इस राजनीतिक टकराव ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर संकट को और गहरा कर दिया है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार को लेकर दोनों गुट अपना-अपना दावा पेश करेंगे।