ट्विटर के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखण्ड से जुड़े कर्मचारियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर ट्विटर के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की। कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर नवीन पेंशन योजना के दोष और पुरानी पेंशन जीपीएफ व्यवस्था के गुणों पर अपने विचार व्यक्त किये।
सीताराम पोखरियाल प्रदेश महासचिव ने कहा कि वर्तमान में कर्मचारियों का भविष्य उस प्रकार से सुरक्षित नहीं है जैसा कि पुरानी जीपीएफ पेंशन योजना से था। नई पेशन योजना कर्मचारियों के हित में नहीं है। एनपीएस जैसी प्राइवेट शेयर बाजार की योजना को समाप्त कर सभी का भविष्य सुरक्षित करने हेतु पुरानी जीपीएफ योजना को बहाल कर दे। यदि एनपीएस इतनी ही सुलझी प्रणाली है तो जो एक दिन का विधायक अथवा मंत्री पद पर शपथ ग्रहण करने के उपरांत जिनका कार्यकाल भी पद के अनुरूप मात्र 5 वर्ष ही होता है उनके लिए पुरानी जीपीएफ पेंशन योजना आज भी सरकार द्वारा यथावत रखी गयी है, जबकि एक कार्मिक जो अपना पूरा जीवन काल सरकारी विभाग में रहकर देश सेवा में लगा रहा है, उसे 30 से 33 साल की सेवा के उपरांत भी मात्र 1000 रूपये पेंशन मिले यह सरकारी कार्मिकों एवं देश के नागरिकों के प्रति अन्यायपूर्ण रवैया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से यथाशीघ्र 1 अक्टूबर 2005 के पश्चात नियुक्त सरकारी अधिकारी/शिक्षक/कार्मिको हेतु पुरानी जीपीएफ व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। ताकि एक सरकारी कार्मिक जो कि अपने जीवन के 30 से 33 साल एक सरकारी विभाग में अपनी दिन रात की सेवा करते हुये दे रहा है उसे उसके बुढापे पर दर बदर न भटकना पडे़। पुरानी जीपीएफ पेंशन योजना लागू करने के सम्बन्ध में ट्विटर पर अनिल बडोनी प्रदेश अध्यक्ष, मिलिन्द्र बिष्ट, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, सीताराम पोखरियाल प्रदेश महासचिव, सौरव नौटियाल जयदीप रावत, भारत बिष्ट, किशोर रौतेला, नरेश नौटियाल आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

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