स्कूलों-मदरसों में वंदे मातरम् पर बवाल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मांगी छूट; सरकार ने कहा-राष्ट्रीय गीत का सम्मान जरूरी

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नई दिल्ली , पश्चिम बंगाल में स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सभी स्कूलों और मदरसों की प्रार्थना सभा में पूर्ण राष्ट्रीय गीत का गायन किया जाएगा।
इस निर्णय पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चिंता व्यक्त की है। बोर्ड ने मांग की है कि इस संबंध में जारी अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए या कम से कम मुस्लिम छात्रों को इससे छूट दी जाए।
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने एक बयान में कहा कि किसी छात्र को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध किसी गीत या पाठ का अनिवार्य रूप से उच्चारण करने के लिए बाध्य करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।वहीं राज्य सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। सरकार का कहना है कि स्कूलों में वंदे मातरम् का गायन भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रीने भी सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् पूरे देश का राष्ट्रीय गीत है और इसे किसी एक धर्म, राज्य या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस विषय के राजनीतिकरण से बचने की अपील की।
इस बीच, कांग्रेस सांसद ने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी पांच पदों के अनिवार्य गायन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन प्रत्येक कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर इसके सभी पदों का गायन आवश्यक नहीं माना जा सकता।
थरूर ने कहा कि परंपरागत रूप से वंदे मातरम् कार्यक्रम की शुरुआत में गाया जाता रहा है, जबकि राष्ट्रीय गान जन गण मन का गायन अलग से किया जाता है। उनके अनुसार, हर कार्यक्रम में सभी पांच पदों का अनिवार्य गायन दर्शकों पर अनावश्यक बोझ डाल सकता है।
थरूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर कुछ विशेष संगठनों की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय गीत पर भी विवाद खड़ा किया जाएगा तो भविष्य में राष्ट्रीय गान पर भी प्रश्न उठ सकते हैं।
गौरतलब है कि वंदे मातरम् की रचना । 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया था।
हाल ही में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रीय गान से पहले वंदे मातरम् के गायन से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, गीत के सभी छह पदों का गायन किया जाएगा और इसके दौरान उपस्थित लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

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