जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पब्लिक इंटर कॉलेज सुरखेत में शनिवार को उत्तराखंड की वीरबाला और शौर्य-पराक्रम की प्रतीक तीलू रौतेली की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिवार ने वीरांगना के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य पुष्कर सिंह नेगी ने तीलू रौतेली के जीवन और वीरगाथा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की रानी लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध तीलू रौतेली का जन्म 8 अगस्त 1661 को एकेश्वर विकासखंड के गुराड़ गांव में थोकदार भूप सिंह रावत के घर हुआ था। प्रधानाचार्य ने बताया कि तीलू रौतेली ने महज 15 वर्ष की उम्र में गढ़वाल पर कत्यूरियों के आक्रमण का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने करीब सात वर्षों तक युद्ध करते हुए अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया तथा 13 किलों को कत्यूरियों के कब्जे से मुक्त कराया। उन्होंने बताया कि 15 मई 1683 को एक युद्ध से लौटने के बाद तीलू रौतेली नयार नदी में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे दुश्मन सेना के एक सैनिक ने उन पर पीछे से हमला कर दिया। मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए महज 22 वर्ष की आयु में वीरांगना तीलू रौतेली वीरगति को प्राप्त हुईं। विद्यालय परिवार ने उनके साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।