विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट

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संवाददाता, चमोली। भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ खोल दिए गए हैं। 11500 फिट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ के कपाट खुलने पर पहली पूजा विश्व के कल्याण और आरोग्यता के लिए महामृत्युंजय जप मंत्र के साथ की गई।चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ उच्च हिमालय में गुफा में हैं। सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त पर शुभ लग्न और नक्षत्र पर भगवान के कपाट खोले गए। रुद्रनाथ के पुजारी आचार्य वेद प्रकाश भट्ट महादेव ने भगवान के मंदिर के कपाट खोले। रुद्रनाथ में मार्ग के आसपास और गुफा मंदिर के निकट भी बर्फ जमी हुई है। इससे रुद्रनाथ धाम का नजारा मनोरम बना हुआ है। इससे पहले रविवार को पनार बुग्याल से भगवान की उत्सव डोली शाम को रुद्रनाथ पहुंची। यह उत्सव डोली गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर से रवाना हुई थी। सोमवार को प्रातº सबसे पहले रुद्रनाथ गुफा द्वार पर लगे विशाल घंटे से घंटनाद किया गया। वेद मंत्रों के साथ पुजारी आचार्य वेद प्रकाश भट्ट ने भगवान के गुफा मंदिर के कपाट खोले। भगवान के प्रथम दर्शन पर ही पुजारी आचार्य महादेव ने विश्व के कल्याण और आरोग्यता के लिये प्रार्थना की। इसके बाद शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद करने पर जिन हिमालयी पुष्पों से भगवान के श्री विग्रह को ढकाया गया था उन्हे मंत्रों के उच्चारण के बीच हटाया गया। कपाट खुलने पर भगवान का प्रथम स्थान स्वर्ग द्वारी और नारद कु़ंड के जल से पुजारी आचार्य महादेव ने किया। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का स्नान हुआ। भगवान रुद्रनाथ का रुद्रामहाभिषेक किया गया। रुद्राष्ठाध्याय का वाचन हुआ और भव्य आरतियां की गयी। विश्व के कल्याण के लिए महामृत्युंजय जाप किया गया। दस दिशाओं और सभी देवी देवताओं का वंदन किया गया।
सोशल डिस्टेंसिंग का रखा ध्यान
लॉकडाउन के कारण इस बार कपाटोद्घाटन पर सीमित संख्या में पुजारी समेत हक हकूकधारी, भगवान की सेवा से जुड़े लोग मंदिर में मौजूद रहे। हिमालय में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया।मुख मंडल के दर्शन11500 फिट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ विश्व में एक मात्र वह पवित्र स्थल है जहां भगवान शंकर के मुख मंडल ( चेहरे ) के दर्शन एकानन रूप में होते हैं। पुजारी आचार्य महादेव भट्ट ने बताया पुराणों में वर्णित शिव के पवित्र पंच केदारों में एक चतुर्थ केदार रुद्रनाथ हैं। रुद्रनाथ के हिमालयी मार्ग के आसपास अभी भी बर्फ जमी है मार्ग खुला है। मंदिर के आसपास भी हल्की बर्फ जमी है ।

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