देहरादून। उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के उद्देश्य से मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को होटल रमाडा, चकराता रोड, देहरादून में आयोजन किया गया। उत्तराखंड सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस के संयुक्त आयोजन में राज्य के विकास की दीर्घकालिक दिशा, चुनौतियों और संभावनाओं पर विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने मंथन किया। कॉन्क्लेव में एमडीडीए, उत्तराखंड टूरिज्म, एचआरडीए, ब्रिडकुल और आईटीडीए सहित विभिन्न संस्थाओं ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम में राज्य के समावेशी, सतत, सुदृढ़ एवं समृद्ध विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
अधिक औसत आय, मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर जीवन गुणवत्ता जरूरी
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि विकसित उत्तराखंड के विजन में राज्य की वर्तमान स्थिति, क्षमताओं, चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित राज्य की सामान्य समझ में अधिक औसत आय, मजबूत अर्थव्यवस्था और नागरिकों के जीवन की उच्च गुणवत्ता शामिल है। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का बेहतर उपयोग, जीएसडीपी में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं को रोजगार योग्य कौशल उपलब्ध कराना, पर्वतीय क्षेत्रों का विकास तथा कृषि को कम मूल्य वाली गतिविधियों से निकालकर उच्च मूल्य, बाजार आधारित, निर्यात एवं प्रसंस्करण आधारित कृषि की ओर ले जाना आवश्यक है।
विकास का अंतिम लक्ष्य लोगों की
खुशी हो: योगेंद्र नारायण
पूर्व रक्षा सचिव भारत सरकार डॉ. योगेंद्र नारायण ने ऑनलाइन माध्यम से कॉन्क्लेव को संबोधित किया। उन्होंने उत्तराखंड की विरासत, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और सामाजिक जवाबदेही को विकास की रणनीति से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास योजनाओं में सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत संरक्षण को अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक क्षेत्रों को पर्यटन, रोजगार और स्थानीय व्यवसायों के अवसर पैदा करने वाली आर्थिक संपत्ति के रूप में विकसित किया जा सकता है।
डॉ. नारायण ने जल निकायों के पुनर्जीवन, जैव विविधता पार्कों को जोड़ने वाले हरित गलियारों, होमस्टे के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। पर्वतीय क्षेत्रों में भारी परिवहन प्रणालियों के विकल्प के रूप में रोपवे जैसे आधुनिक परिवहन साधनों पर ध्यान देने का सुझाव भी दिया।
उन्होंने कहा कि विकास का अंतिम लक्ष्य केवल जीडीपी बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों की खुशी होना चाहिए। उन्होंने राज्य में लोगों के जीवन की गुणवत्ता और खुशी को विकास के आकलन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय निकायों और पंचायतों को मजबूत करने पर जोर
पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड श्री एन. रविशंकर ने स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों को सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के तहत कई विभागों के एकीकरण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने का सुझाव दिया।
उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर जिला योजना समिति के गठन तथा मुख्य विकास अधिकारी को जिला पंचायत का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने का सुझाव दिया, ताकि जिले में विकास योजनाओं को बेहतर समन्वय के साथ लागू किया जा सके।