विपक्षी दलों के संसद सत्र के बहिष्कार के बीच राज्यसभा में बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक

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नई दिल्ली। एक दिन पहले व्यस्त गतिविधियों, विरोध प्रदर्शन और कई बिलों के पारित होने के बाद मंगलवार को राज्यसभा ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक बुलाई है। लेकिन, संसद के बाकी सत्र के बहिष्कार का ऐलान कर चुका विपक्ष इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगा।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, समाजवादी पार्टी सांसद राम गोपाल यादव, कांग्रेस के आनंद शर्मा और जयराम रमेश, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ऐसे पांच विपक्षी नेता है जो 11 सदस्यीय समिति की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में बीएसी एक पैनल है, जहां पर सदन के हफ्ते भर के एजेंडे पर चर्चा होती है। एक या दो दिनों में सदन के स्थगित करने के संकेतों के बीच यह बैठक बुलाई गई है।
विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि बीएसी की बैठक से महज एक घंटे पहले उन्हें इसके बारे में जानकारी दी गई, जिसके चलते उन्हें बैठक में हिस्सा लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। राज्यसभा के अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक शर्ट नोटिस पर बुलाई गई और पैनल के सभी सदस्यों को सूचित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे।
रविवार को राज्यसभा ने सदन में भारी प्रदर्शन के बीच षि से संबंधित दो बिल- षि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020, और मूल्य आश्वासन और षि सेवा विधेयक, 2020 (सशक्तीकरण और संरक्षण) पारित किए गए। एक तरफ से विपक्ष का दावा ह कि षि संबंधी बिल किसान विरोधी है तो वहीं सरकार का यह कहना है कि इस बिल से निजी निवेशों के जरिए षि को बढ़ावा मिलेगा। सोमवार को भारी शोर शराबे और बुरे बर्ताव को लेकर आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया था।

विपक्ष के बहिष्कार के बीच श्रम संहिता के तीन विधेयक पारित
लोकसभा में विपक्ष के बहिष्कार के बीच श्रम संहिता के तीन विधेयकों को पारित कर दिया गया। सदन में मौजूद सांसदों ने ध्वनीमत से विधेयक को पारित किया
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री संतोष गंगवार लोकसभा मेंउपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 विधेयक पारित किए जाने को लेकर सांसदों द्वारा विचार रखने के बाद सदन को विधेयक को लेकर जानकारी दे रहेहैं। गंगवार ने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए हमने ट्रेड यूनियनों को इस कानून में मान्यता दी है। ट्रेड यूनियनों को संस्थान, राज्य और केंद्र स्तर पर मान्यता मिलेगी।

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