कोलकाता में वामपंथियों के विरोध मार्च में घुसे कॉकरोच

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-सीजेपी ने बदला पैंतरा, पुलिस की रणनीति पर फेरा पानी
कोलकाता, महानगर की कोलकाता पुलिस से अलग रैली की अनुमति न मिलने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी ) और छात्रों के तेवर ढीले नहीं पड़े। पुलिस प्रशासन को चकमा देते हुए सीजेपी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया और वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा आयोजित विशाल मार्च में शामिल हो गई। सियालदह से एस्प्लेनेड तक निकले इस संयुक्त विरोध मार्च में छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पुरजोर मांग की।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का सीधा असर कोलकाता की सड़कों पर इस तरह देखने को मिलेगा। यह विशाल विरोध प्रदर्शन लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक की लंबी भूख हड़ताल के समर्थन में और देश की केंद्रीय परीक्षा प्रणालियों (नीट आदि) में लगातार सामने आ रही खामियों के विरोध में आयोजित किया गया था। दोपहर करीब 2:30 बजे जैसे ही यह जुलूस सियालदह स्टेशन परिसर से शुरू हुआ, हजारों की संख्या में छात्र इसमें जुड़ते चले गए। प्रदर्शनकारियों का उत्साह और विरोध का तरीका अनोखा था।
हाथों में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले तीखे पोस्टर थे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने दो टूक कहा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है, वह केवल राजधानी का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं और छात्रों के भविष्य का संघर्ष है। वहीं सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधि देदीप्य गांगुली ने संगठन का रुख साफ करते हुए कहा,
पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने के कारण हमें दोपहर 4 बजे अपने अलग बैनर तले निकलने वाला मार्च रद्द करना पड़ा। लेकिन हमारी लड़ाई रुकने वाली नहीं है। हमने तुरंत फैसला लिया कि हमारे समर्थक और छात्र सियालदह से एस्प्लेनेड तक निकलने वाले संयुक्त छात्र मार्च का हिस्सा बनकर ही अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे। पूर्वनिर्धारित योजना के अनुसार यह विशाल जुलूस सियालदह स्टेशन से शुरू होकर एस.एन. बनर्जी रोड होते हुए धर्मतला (एस्प्लेनेड) पहुंचकर समाप्त हुआ। कोलकाता ट्रैफिक पुलिस के सूत्रों के अनुसार, यदि सीजेपी और वामपंथी संगठन अलग-अलग रूटों से रैलियाँ निकालते, तो सेंट्रल एवेन्यू, कॉलेज स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड और एस.एन. बनर्जी रोड पर भयानक ट्रैफिक जाम लग सकता था। अंतिम समय में दोनों रैलियों का विलय होने और एक ही मार्ग से गुजरने के कारण आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिली। बहरहाल जो भी हो लेकिन सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को लेकर बंगाल के युवाओं और अभिभावकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। इंटरनेट पर कॉकरोचेस ऑफ बंगाल एक हो जैसे नारे तेजी से वायरल हो रहे हैं।दूसरी ओर, राजनीतिक हलचलों पर नजर रख रहे पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि, हमारी पार्टी या सरकार किसी भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के खिलाफ नहीं है।

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