लोकतंत्र सेनानी नरेंद्र उनियाल को किया याद, लोकतंत्र में असहमति और सहिष्णुता पर हुई चर्चा

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नरेंद्र उनियाल मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से देहरादून में आयोजित किया गया कार्यक्रम
जयन्त प्रतिनिधि।
देहरादून : नरेंद्र उनियाल मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से राज्य आंदोलन के सूत्रधार, गढ़वाल में विश्वविद्यालय निर्माण आंदोलन के प्रमुख प्रेरणास्रोत, जयप्रकाश (जेपी) आंदोलन के गढ़वाल संयोजक, धधकता पहाड़ एवं जयन्त जैसे चर्चित समाचार पत्रों के संस्थापक-संपादक व प्रमुख राष्ट्रवादी पत्रकार अमर शहीद लोकतंत्र सेनानी स्व. नरेंद्र उनियाल की 46वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस दौरान लोकतंत्र में असहमति और सहिष्णुता विषय पर चर्चा की गई।
देहरादून स्थित ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल, रेसकोर्स में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने की। कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्व. नरेन्द्र उनियाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन, निर्भीक पत्रकारिता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. नरेन्द्र उनियाल ने अपने केवल 29 वर्ष के अल्प जीवनकाल में पत्रकारिता और जनआंदोलनों के क्षेत्र में वह पहचान बनाई, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने निर्भीक, निष्पक्ष और जनपक्षधर पत्रकारिता को नई दिशा दी तथा अपने लेखन और वैचारिक नेतृत्व से उत्तराखण्ड की जनता की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य किया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की वैचारिक नींव को मजबूत करने में स्व. उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने गढ़वाल निर्माण विश्वविद्यालय आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा जेपी आंदोलन के दौरान गढ़वाल क्षेत्र में लोकतांत्रिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का उल्लेखनीय कार्य किया। धधकता पहाड़ और जयन्त जैसे प्रकाशनों के माध्यम से उन्होंने समाज के वंचित, उपेक्षित और आम नागरिकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

लोकतंत्र में असहमति बनाम असहिष्णुता’ विषय पर विचार गोष्ठी
पुण्यतिथि के अवसर पर ‘लोकतंत्र में असहमति बनाम असहिष्णुता’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य में बढ़ती असहिष्णुता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, क्योंकि यह विचारों की विविधता, संवाद और स्वस्थ विमर्श को जन्म देती है। इसके विपरीत असहिष्णुता लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में विचारों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। लोकतंत्र में विभिन्न विचारों का सम्मान ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि बहुमत के आधार पर निर्णय लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष और असहमत विचारों का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। स्वस्थ लोकतंत्र वही है, जहाँ संवाद, सहमति और असहमति-तीनों को समान महत्व दिया जाए।

पत्रकार हितों के लिए एकजुट होने का लिया संकल्प
गोष्ठी में उपस्थित पत्रकारों ने पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि पत्रकारों के हितों की प्रभावी रक्षा के लिए सभी पत्रकार संगठनों को व्यक्तिगत और संगठनात्मक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। इस अवसर पर पत्रकारों के हितों एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सामूहिक संघर्ष का संकल्प भी लिया गया।

इन वक्ताओं ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत, डॉ. बी.डी. शर्मा, भगीरथ शर्मा, ब्रह्मदत्त शर्मा, मीरा रावत, मनोज इष्टवाल, पुष्कर नेगी, अरुण शर्मा, मोहम्मद खालिद, दिगम्बर सिंह पंवार, अमित बडोला सहित अनेक पत्रकारों एवं प्रबुद्ध जनों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए स्व. नरेंद्र उनियाल के योगदान को स्मरण किया और उनके आदर्शों को वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष चंद्र नौटियाल ने किया, जबकि अंत में नरेंद्र उनियाल मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष नागेंद्र उनियाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन स्व. नरेंद्र उनियाल के आदर्शों पर चलने, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

अरूण भट्ट ने किया याद
उत्तराखंड के निर्भीक पत्रकारिता के ध्वज वाहन व उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी स्व. नरेंद्र उनियाल की पुण्य तिथि पर अधिवक्ता व बार एसोशिएन के पूर्व अध्यक्ष अरूण कुमार भट्ट ने भी उन्हें श्रद्धंजलि दी। कहा कि समाज हित में दिए गए उनियाल के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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