-29 नेता भाजपा में, 9 कांग्रेस में गए, नागालैंड में सबसे ज्यादा 32 मामले
नई दिल्ली , एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद कुल 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सदस्य, सात राज्यसभा सदस्य और 78 विधायक शामिल हैं। यह विश्लेषण इस अवधि में हुए चुनाव और उपचुनावों के आधार पर किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 111 मामलों में व्यक्तिगत तौर पर पार्टी बदलना, राजनीतिक दलों का विलय, इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव जीतना तथा अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव जीतना शामिल है। एडीआर ने यह भी कहा है कि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े व्यवस्थित रूप से एक जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण रिपोर्ट में सभी मामलों का शामिल होना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलकर दूसरी पार्टियों में शामिल होने वाले नेताओं में सबसे अधिक 32 नेता नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) में गए। इसके बाद भाजपा में 29 और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में 20 नेता शामिल हुए। कांग्रेस में नौ, शिवसेना में आठ, नेशनल पीपुल्स पार्टी में छह और अरुणाचल प्रदेश पीपुल्स पार्टी में चार नेता शामिल हुए।
भाजपा में शामिल हुए 29 नेताओं में सात राज्यसभा सदस्य और 22 विधायक थे। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें गोवा के आठ कांग्रेस विधायक, गुजरात के चार कांग्रेस विधायक और हिमाचल प्रदेश के दो विधायक शामिल थे। मणिपुर के पांच जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक भी भाजपा में शामिल हुए। भाजपा में शामिल होने वाले सातों राज्यसभा सदस्य आम आदमी पार्टी से थे। इनमें राघव चड्ढा के नेतृत्व में पार्टी बदलने वाले सदस्य शामिल हैं। इस अवधि में कोई लोकसभा सदस्य भाजपा में शामिल नहीं हुआ।
राज्यवार आंकड़ों में नागालैंड सबसे ऊपर रहा, जहां 32 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20, तेलंगाना में नौ तथा गोवा और पंजाब में आठ-आठ मामले सामने आए। कुल मिलाकर 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पार्टी बदलने के मामले दर्ज किए गए।
हालांकि, नागालैंड के 32 मामलों की प्रकृति अन्य मामलों से अलग है। एडीआर के अनुसार, ये मामले वर्ष 2025 में हुए राजनीतिक दलों के विलय से जुड़े हैं। इन 32 विधायकों में 25 पहले राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक प्रगतिशील पार्टी (एनडीपीपी) के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में नागा पीपुल्स फ्रंट में शामिल हुए। इसलिए नागालैंड का आंकड़ा व्यक्तिगत दल-बदल के बजाय मुख्य रूप से राजनीतिक दल के विलय का परिणाम है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन राजनीतिक दलों से नेताओं ने पार्टी बदली, उनमें राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक प्रगतिशील पार्टी के 25, तृणमूल कांग्रेस के 20 और कांग्रेस के 19 नेता शामिल हैं। इसके अलावा भारत राष्ट्र समिति के नौ, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सात-सात, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह, जनता दल (यूनाइटेड) के पांच और नेशनल पीपुल्स पार्टी के चार नेताओं ने पार्टी बदली।
एनडीपीपी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से पार्टी बदलने वाले नेताओं की संख्या 64 रही, जो कुल 111 मामलों का करीब 58 प्रतिशत है।
पश्चिम बंगाल में पार्टी बदलने के सभी 20 मामले लोकसभा सदस्यों से जुड़े रहे। रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी सदस्य तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में चले गए।
एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने रिपोर्ट में राजनीतिक दलों के बीच नेताओं के आवागमन के इन आंकड़ों को दर्ज करते हुए दल-बदल से जुड़े मौजूदा संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट का विश्लेषण 12 जुलाई 2026 तक उपलब्ध मामलों पर आधारित है।