नई दिल्ली , निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में उठे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में पूर्ण आयोग की बैठक की। बैठक के बाद आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए प्रपत्र-6 में बदलाव, मतदाता सूची के आंकड़ों तक अधिकारियों की पहुंच, गोवा में 97 मतदाताओं के नाम और पश्चिम बंगाल में अपीलों सहित विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया।
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 में एसआईआर से संबंधित घोषणा जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। आयोग ने कहा कि प्रपत्र-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया है। आयोग के अनुसार यह घोषणा विशेष रूप से एसआईआर प्रक्रिया के लिए है। एसआईआर के अलावा सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत निर्धारित प्रपत्र का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
मतदाता सूची के आंकड़ों के केंद्रीकरण और चुनाव अधिकारियों को इसकी पहुंच दिए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के तहत ईसीआईनेट तक पहुंच प्रदान की गई है।
आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट प्रणाली की प्रक्रियाओं के अनुपालन और कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे और इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एक विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
गोवा में मतदाता पंजीकरण अधिकारियों द्वारा तार्किक विसंगतियों के आधार पर 97 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मामला भी बैठक में सामने आया। बाद की जांच में ये मतदाता पात्र पाए गए थे, लेकिन उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके थे।
आयोग ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को ऐसे छूटे हुए मतदाताओं के घर जाकर उनके प्रपत्र एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। आयोग के अनुसार 97 में से 81 मतदाताओं ने प्रपत्र-6 भरकर अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने आयोग की पूर्ण स्वीकृति के बिना जारी किए गए कुछ आदेशों पर आपत्ति जताई थी। डॉ. विवेक जोशी ने भी भविष्य में आयोग के स्तर पर जारी होने वाले संचार के लिए आवश्यक स्वीकृति लिए जाने की बात कही थी।
इस मुद्दे पर आयोग ने किसी विशेष आदेश के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर कहा कि आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से सभी सदस्यों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैठकों की कार्यवाही का विवरण भी जारी किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। डॉ. संधू ने यह जानना चाहा था कि चुनाव आयोग की ओर से अपील दायर करने के लिए कौन अधिकृत है और वास्तव में अपील किसने दायर की है।
आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के बाद आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर से संबंधित प्रमुख निर्णय और कार्यक्रम तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे। आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरणों का उद्देश्य हाल में सामने आए मतदाता सूची और आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करना था।
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