आलू की फसल बनी खुशहाली की राह, किसानों को मिला मेहनत का भाव

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उत्तरकाशी। टकनौर क्षेत्र के बार्सू सहित द्वारी गांव में आलू काश्तकारों के लिए एक निजी कंपनी नई उम्मीद बन कर आई है। वर्षों से काश्तकारों को आलू के उत्पादन पर उनकी मेहनत और खर्च की गई धनराशि का पूरा मूल्य भी नहीं मिल पा रहा था लेकिन अब कंपनी की ओर से काश्तकारों से सीधा आलू खरीदार उन्हें ग्रेडिंग के बाद प्रति बोरे पर दोगुना दाम दे रही है।
बार्सू निवासी यजवेंद्र रावत, द्वारी प्रधान सज्जन नेगी, भागवत रावत, सत्ये सिंह रावत, धमेंद्र रावत का कहना है कि शासन-प्रशासन की आज तक आलू का समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किया है। इस कारण काश्तकार पिछले कई वर्षों से आलू के 50 किलो के बोरे को चार सौ 50 से चार सौ 75 के दाम पर बेचने को मजबूर थे। इस कारण काश्तकारों का बीज का दाम भी मूल्य भी उन्हें मिल पाता।
यजवेंद्र रावत ने बताया कि एक वर्ष टाटा ग्रुप से संबंधित बिग बास्केट कंपनी के लोगों की ओर से बार्सू सहित आसपास के गांव में निरीक्षण किया। इस वर्ष से इस कंपनी की ओर से काश्तकारों से सीधा 50 किलो के प्रति बोरे के हिसाब से आठ सौ 75 के दर पर आलू की खरीद की जा रही है। ग्रेडिंग के बाद इससे काश्तकारों के पास बीज के लिए आलू भी बच रहे हैं। साथ ही उनको उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है।

 

 

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