जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नगर निगम की ओर से आयोजित बोर्ड बैठक में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) का मुद्दा छाया रहा। जिसके चलते पार्षदों के बीच तीखी बहस भी हुई। इस दौरान पार्षदों ने बोर्ड को अपने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं से भी अवगत करवाया।

सोमवार को महापौर शैलेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पार्षद हिमांशु वर्मा ने गाड़ीघाट स्थित एक निजी विद्यालय में आरटीई के तहत एक ही समुदाय के पांच बच्चों को प्रवेश दिए जाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के बच्चों को आरटीई का समान रूप से लाभ मिलना चाहिए। इस पर पार्षद नईम अहमद, प्रवेंद्र सिंह रावत और सूरज प्रसाद कांति ने आपत्ति जताई। इसी दौरान सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। मामला बढ़ता देख महापौर शैलेंद्र सिंह रावत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नगर निगम का सदन किसी राजनीतिक दल का मंच नहीं है। यह पार्षदों और जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए है। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मामला शांत हुआ। पार्षदों ने आरटीई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने की मांग की। बैठक में कई पार्षदों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पिछली बोर्ड बैठक में जिन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था, उनमें से कई का अब तक समाधान नहीं हुआ है। इसके कारण उन्हें वहीं मुद्दे दोबारा सदन में रखने पड़ रहे हैं। पार्षदों ने इसे विभागीय स्तर पर बरती जा रही लापरवाही और उदासीनता बताया।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
पार्षद अनिल रावत ने नगर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने की मांग की। पार्षद राजेंद्र सिंह ने सड़क खोदकर पाइपलाइन बिछाने के बाद लंबे समय तक सड़कों की मरम्मत नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जगह-जगह खुदी सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद कई स्थानों पर उनमें पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।