एक्ट 2020 लागू होने से पहले ही विवादों के घेरे में

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जयन्त प्रतिनिधि।
लैंसडौन। छावनी परिषद का प्रस्तावित कैंट एक्ट 2020 लागू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गया है। जनता का आरोप है कि सरकार की ओर से कैंट क्षेत्रों को लोकतांत्रिक बनाने के लिए सुमित बोस एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है। लेकिन रक्षा मंत्रालय की ओर से इस कमेटी के सुझावों को दरकिनार कर दिया गया है।
प्रस्तावित कैंट एक्ट 2020 में संशोधन के लिए क्षेत्रीय विधायक दलीप रावत ने रक्षा मंत्रालय को सुझाव दिए है। विधायक ने प्रस्तावित प्रारूप में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को दरकिनार कर सेना की ओर से बैरिकेटिंग लगाकर सिविल यातायात बाधित करने समेत कई मुद्दों को लेकर रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव का ध्यान उत्कृष्ट करवाया है। विधायक दलीप रावत ने कहा कि प्रजातांत्रिक पद्धति में अपील सुनने का अधिकार जनपद के न्यायधीश में निहित होना चाहिए, लेकिन कैंट में ऐसा नही है। प्रावधानों के अनुसार जनरल अफसर कमांडिग इन चीफ को छावनी परिषद द्वारा प्रस्ताव को स्थगित करने, बढ़ाने अथवा निरस्त करने का अधिकार दिया गया है, जो प्रजातांत्रिक पद्धति के विरूद्ध है।

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