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अल्मोड़ा में आठ साल बाद इतनी भारी बर्फबारी, चोटी से मैदान तक बर्फ की चादर

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अल्मोड़ा । पहाड़ में सुबह से ही बारिश के बाद अपरान्ह में जिला मुख्यालय समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। मुख्यालय को दो वर्ष बाद कुदरत ने हिमपात की सौगात दी। बारिश व बर्फबारी से समूचा जिला एक बार फिर से कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गया है। न्यूनतम तापमान 0़1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। षि विज्ञानियों ने बारिश व हिमपात को रबी फसल तथा उद्यानों के लिए लाभकारी बताया है।
पहाड़ में मौसम ने बुधवार से ही करवट बदलनी शुरू कर दी थी। गुरुवार को सुबह से ही आकाश बादलों से पटा रहा व बाद में बारिश का दौर शुरू हुआ। अपराह्न में जिला मुख्यालय समेत बिनसर, कसारदेवी, भनोली, स्याल्दे, पनुवानौला, जागेश्वर, झांकरसैम, शौकियाथल, विमलकोट, मिरतोला, भगरतोला, आरतोला, गुरणाबांज, सुआखान, मोरनौला आदि क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। बर्फबारी को लेकर बच्चों में काफी उत्साह दिखाई दिया। मुख्यालय में दो साल बाद हिमपात हुआ। वर्ष 2020 के फरवरी माह में तथा इससे पहले वर्ष 2014 के दिसंबर माह में जिला मुख्यालय में बर्फबारी हुई थी।
मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार ने बारिश व हिमपात को रबी फसलों के लिए लाभकारी बताया है। उनका कहना है कि बारिश से जहां रबी फसलों गेहूं, जौ वगैरह की बढ़वार तेजी से होगी। वहीं हिमपात से व बारिश से खेतों में काफी समय तक नमी बनी रहेगी। इससे रबी फसल की पैदावार बढ़ सकेगी। इसका लाभ काश्तकारों को मिलेगा
मुख्य उद्यान अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि बर्फबारी औद्यानिकी के लिए बेहतर है। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सेब, आढ़घ्ू व पुलम का बेहतर उत्पादन होगा। इससे बागबानों को राहत मिल सकेगी। खासकर सेब के लिए तो हिमपात काफी फायदेमंद है।
बर्फबारी वनाग्नि सुरक्षा के लिए भी लाभकारी है। बर्फबारी तथा बारिश से वनों में काफी समय तक नमी बनी रहेगी। पहाड़ में अधिकांश वन क्षेत्र चीड़ के वनों से घिरे हैं। ऐसे में विभाग को फरवरी माह से ही वनाग्नि सुरक्षा की चिंता सताती है। हालिया हिमपात व बारिश से वन विभाग को कुछ समय के लिए राहत मिल सकेगी।

 

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