नई दिल्ली , केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर चले छात्र आंदोलन के बीच समाजसेवी अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद या जनसमस्या का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि संवाद, धैर्य और शांतिपूर्ण आंदोलन से ही संभव है।
89 वर्षीय अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए अहिंसा का मार्ग अपनाना आवश्यक है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण आंदोलन सरकार तक जनता की बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न जनहित के मुद्दों पर 22 बार अनशन किए, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। उनके अनुसार, बातचीत और आपसी समझ से ही सकारात्मक परिणाम निकलते हैं और लोकतंत्र की मजबूती भी इसी में है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि इस घटनाक्रम को जीत या हार के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बात जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान तलाशना है।
अन्ना हजारे ने सरकार और प्रशासन को भी सलाह दी कि जनभावनाओं को समझते हुए समय पर संवाद स्थापित किया जाए। उनका कहना था कि जब सरकार और जनता के बीच बातचीत बनी रहती है, तब अधिकांश विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए जा सकते हैं।
उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र की असली ताकत टकराव में नहीं, बल्कि संवाद, पारदर्शिता और अहिंसक जनभागीदारी में निहित है