तनाव मुक्त माहौल में ही किया जा सकता है बेहतर कार्य

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– स्ट्रेस फ्री एडमिनिस्ट्रेशन विषय पर आयोजित की गई कार्यशाला
जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : कर्मचारियों व अधिकारियों को ज्यादा तनाव देकर उनसे बेहतर कार्य नहीं कराया जा सकता है। यदि उनसे उच्च कोटि का कार्य चाहिए तो उन्हें तनाव मुक्त माहौल देना जरूरी है। यह बात ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय ईश्वरी की ओर से स्ट्रेस फ्री एडमिनिस्ट्रेशन विषय पर आयोजित कार्यशाला में पूर्व आईएएस सीताराम मीणा ने कही।
मंगलवार को विकासभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व आईएएस सीताराम मीणा ने कहा कि सरकारी कामकाज के दौरान अधिकारी व कर्मचारी काफी तनाव का सामना करते हैं। कहा कि जब भी कोई व्यक्ति बेहतर कार्य करता है तो उसकी उसके कार्य के अनुसार तारीफ करने से व्यक्ति की कार्यशैली में और निखार आता है। उन्होंने कहा कि तनाव से बचने के लिए एक बेहतर तरीका यह भी है कि जो चीजें हमारे क्षेत्राधिकार में हैं हम उसमें ही बदलाव की कोशिश करें। जो हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर की चीजें हैं, उसमें केवल सिफारिश के अतिरिक्त कुछ न करें। बल्कि उसको उसी रूप में स्वीकार किया जाय, क्योंकि हम नियम बनाने के पार्ट नहीं बल्कि निर्णयों को लागू करने(एग्जीक्यूटिव) के पार्ट हैं। जो निर्णय हो चुके हैं हम उनको अपनी बेहतर क्षमता से अधिकतम लोगों को उसका लाभ देने का प्रयास करें। स्ट्रेस मुक्ति का उन्होंने उपाय बताते हुए कहा कि हम अपने को जब तक केवल शरीर समझते रहेंगें, तब तक हमारे पास जो भी ऊर्जा है वह भी कम होती जाती है। बल्कि हमें अपने आपको आत्मा समझना चाहिए और उसका कनेक्शन सर्वशक्तिमान परमात्मा से करना होगा। उन्होंने कहा कि कितनी अजीब बात है कि हम अपने गैजेटस (मोबाइल की बैटरी) को रोजना चार्ज करते हैं किन्तु अपनी आत्मा को चार्ज नहीं करते। आत्मा को चार्ज करने का मतलब है कि हम 24 घंटे में कम से कम 1 घंटा अपने लिए दें। उस एक घंटे में हम अपने आपको अकेला करके अपने आपसे बाते करें, अपने अन्दर झांके कि हम इस दुनिया में क्यों हैं, हम क्या चाहत हैं, हम क्या कर रहे हैं, हमें क्या करना चाहिए? इसी को मेडिटेशन (ध्यान) कहते हैं। इससे हम अपने को नियंत्रित कर पायेंगे, हमारा मन भटकेगा नहीं, हमारा काम में मन लगेगा और काम करते समय आनंद आयेगा। इस मौके पर जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि देने वाले और ग्रहण करने वाले के बीच यदि तालमेल होगा, एक सुर होगा तो स्ट्रेस नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी को एक बस कन्डक्टर (परिचालक) की भांति व्यवहार करना चाहिए। जिस प्रकार परिचालक का बस में यात्रा करने वालों से कोई संबंध नहीं होता फिर भी यात्रियों से सही पैसे लेता है, सही पैसे देता है और जो पैसे प्राप्त करता है उसका भी वह अपने को स्वामी नहीं मानता बल्कि उसकी सुरक्षा करके उसे राजकोष में जमा करता है और यात्रियों को सुरक्षित और सहजता से उनके गंतव्य तक पहुंचाता है, ठीक उसी तरह एक अधिकारी को भी सरकार व शासन द्वारा जो नियम निर्धारित किये गये हैं उसका खुशी-खुशी अनुपालन करते हुए पादर्शिता व निष्ठा से अधिकमत लोगों के कल्याण की भावना से काम करना चाहिए। इस अवसर पर परियोजना निदेशक संजीव कुमार राय, जिला विकास अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह चौहान, जितेंद्र कुमार, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने, मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश नित्वाल, राजयोग शिक्षिका मोताली, नीलम, सुमन, प्रति, अनुसुमन आदि मौजूद रहे।

70 प्रतिशत बीमारियों की जड़ तनाव
ब्रह्मकुमारी विश्व विद्यालय के महरचंद ने कहा कि आज दुनिया की 70 प्रतिशत बीमारियां तनाव के चलते हो रही हैं। दुनिया का कोई भी जीव चिन्ता नहीं करता, जबकि मनुष्य सबसे ज्यादा सक्षम-बुद्धिजीवी होने के बाद भी चिंता-तनाव से मरा जा रहा है। उन्होंने चिन्ता और तनाव का कारण मनुष्य का अपने को समय ना देना बताया। मनुष्य यदि अपने अंदर झांकें तो वह तनाव का मैनेजमेंट कर सकता है क्योंकि ईश्वर ने आत्मा को सारी शक्ति दी है जरूरत है बस उसको जगाने की और वह जागेगी मेडिटेशन से, योग-ध्यान से।

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