सीमा विवाद: अप्रिय घटना से बचने के होने चाहिए प्रयास

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-भारत और चीन के बीच बनी सहमति
-भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 23वीं बैठक
नई दिल्ली, एएनआइ। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच गुरुवार को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 23वीं बैठक हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में स्थिति पर स्पष्ट और गहन चर्चा की। 10 अक्टूबर को दोनों पक्षों के वरिष्ठ कमांडरों के बीच हुई पिछली बैठक के बाद के घटनाक्रम की समीक्षा की।
मंत्रालय ने आगे कहा कि बार्डर पर गतिरोध के संबंध में दोनों पक्ष द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन करते हुए पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में शेष मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने की आवश्यकता पर सहमत हुए, ताकि शांति बहाल हो सके। भारत और चीन इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को जमीन पर स्थिर स्थिति सुनिश्चित करना जारी रखना चाहिए और किसी भी अप्रिय घटना से बचना चाहिए। इस बात पर सहमति हुई कि दोनों पक्षों को वरिष्ठ कमांडरों की बैठक का अगला (14वां) दौर जल्द से जल्द आयोजित होना चाहिए। चीन के साथ सीमा पर तनाव पिछले डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से बना हुआ है। दोनों तरफ से हजारों सैनिक सीमाओं पर तैनात है। पिछले साल जून में खूनी झड़प भी हो गई थी। गतिरोध को सुलझाने के लिए सैन्य स्तर पर 13 दौर की वार्ता हो चुकी है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर आखिरी इस साल अक्टूबर में कोर कमांडर स्तर पर सैन्य वार्ता हुई थी। हालांकि, इस बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला। बैठक के बाद भारत ने कहा, ‘बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने शेष क्षेत्रों में गतिरोध को सुलझाने के लिए रचनात्मक सुझाव दिए, लेकिन चीनी पक्ष इससे सहमत नहीं था और कोई प्रस्ताव भी प्रदान नहीं कर सका। इस प्रकार बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला।’ भारत का कहना है कि एलएसी पर तनाव की स्थिति चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के एकतरफा प्रयासों के कारण हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि चीनी पक्ष उचित कदम उठाए ताकि शांति बहाल हो सके।

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