17-18 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में जुटेंगे सदस्य देश, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर होगा मंथन
सतत जीवनशैली, वनीकरण, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु अनुकूलन भारत की चार प्रमुख प्राथमिकताएं
नई दिल्ली , भारत अपनी वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 17 और 18 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकों की मेजबानी करेगा। इन बैठकों में ब्रिक्स सदस्य देश पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और आपदा के प्रति दृढ़ता से जुड़ी साझा प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करेंगे तथा मजबूत और टिकाऊ भविष्य के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
18 अगस्त को ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक आयोजित होगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे। इससे पहले 17 अगस्त को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी, जिसमें ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह तथा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
ये बैठकें भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 की मुख्य थीम ‘सुदृढ़ता, नवाचार, सहयोग और सतत विकासÓ के अनुरूप आयोजित की जा रही हैं।
पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने का मंच
ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक सदस्य देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को साझा पर्यावरणीय चुनौतियों पर सार्थक चर्चा करने, आम सहमति विकसित करने और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।
बैठक के दूसरे दिन मंत्री स्तर पर परिणामी दस्तावेजों और विभिन्न विषयगत मुद्दों पर चर्चा होगी। इन चर्चाओं से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति ब्रिक्स देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत ने तय की चार प्रमुख प्राथमिकताएं
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पर्यावरण कार्य समूह के तहत केंद्रित गतिविधियों के लिए चार प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र निर्धारित किए हैं।
1. सतत जीवनशैली को बढ़ावा
पहली प्राथमिकता सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने से संबंधित है। इसके तहत विवेकपूर्ण उपभोग और समुदाय आधारित व्यवहार के माध्यम से पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
सदस्य देशों के बीच ज्ञान, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और सफल प्रयोगों का आदान-प्रदान किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के लिए नए और प्रभावी उपाय विकसित किए जा सकें।
2. वनीकरण, जंगल की आग प्रबंधन और आपदा के प्रति दृढ़ता
दूसरी प्राथमिकता वनीकरण, भूमि बहाली, जंगल की आग के प्रबंधन और आपदा के प्रति दृढ़ता बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके तहत संरचित ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बेहतर आंकड़ा संग्रह तथा निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
एकीकृत और परिदृश्य आधारित हरित दृष्टिकोणों के माध्यम से साझा पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान तलाशा जाएगा। जंगल की आग की रोकथाम, पूर्व तैयारी, समय पर पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।
3. चक्रीय अर्थव्यवस्था
तीसरी प्राथमिकता चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। इसके तहत प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मजबूत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व नीतिगत ढांचे और नियामक उपायों को विकसित करने पर चर्चा होगी।
इसका उद्देश्य सदस्य देशों में श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करना, संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना और अधिक टिकाऊ तथा समानतापूर्ण चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है।
4. जलवायु अनुकूलन
चौथी प्राथमिकता जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन से संबंधित है। इसके तहत पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय आधारित अनुकूलन उपायों के माध्यम से सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग, ज्ञान और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर आधारित नीति संबंधी परिणामों पर चर्चा की जाएगी। इससे ब्रिक्स देशों में जलवायु परिवर्तन के प्रति सुदृढ़ता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मार्च से जुलाई तक हुई तैयारियां
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत मार्च से जुलाई 2026 के बीच विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान आभासी बैठकों, तकनीकी सत्रों, वेबिनार और विभिन्न स्तरों पर संवाद का आयोजन किया गया।
इन बैठकों में संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा कार्बन बाजारों को अनुकूलन लक्ष्यों से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने तथा आपदा के प्रति सुदृढ़ता बढ़ाने के लिए जंगल की आग के प्रबंधन के एकीकृत तरीकों पर भी वेबिनार आयोजित किए गए।
इन सभी परामर्शों से सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने और 17-18 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाली आमने-सामने की बैठकों के लिए आधार तैयार हुआ है।