लक्ष्य सेन : कॉमनवेल्थ में जीता स्वर्ण, ओलंपिक में भी देश को पदक की उम्मीद

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नई दिल्ली , भारत में बैडमिंटन बहुत ही तेजी से उभरता और लोकप्रिय होता खेल है। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अपने दमदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हासिल सफलता से वैश्विक स्तर पर अपना लोहा मनवाया है। विश्व पटल पर तेजी से उभरे जिन भारतीय खिलाड़ियों का नाम प्रमुखता से लिया है, उनमें लक्ष्य सेन प्रमुख हैं। वह एकल वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। लक्ष्य सेन का जन्म 16 अगस्त 2001 को अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था।
बैडमिंटन सेन को विरासत में मिला है। इस खेल में वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। बैडमिंटन में बेहतर करियर के लिए लक्ष्य 10 साल की उम्र में बेंगलुरु चले गए। उन्होंने विमल कुमार से बैडमिंटन की ट्रेनिंग ली है। प्रकाश पाडुकोण उनके मेंटर रहे हैं। 2014 में, उन्होंने स्विस जूनियर इंटरनेशनल जीता। फिर फरवरी 2017 में वे बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर रैंकिंग में नंबर एक जूनियर एकल खिलाड़ी बन गए। सेन 2018 एशियन जूनियर चैंपियनशिप में चैंपियन बने, उन्होंने फाइनल में टॉप सीडेड वर्ल्ड जूनियर नंबर 1 कुनलावुत विटिडसार्न को 21-19, 21-18 से हराया।
लक्ष्य ने यूथ ओलंपिक 2018 में मिश्रित टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता था। जूनियर स्तर पर दमदार प्रदर्शन के सिलसिले को सेन ने सीनियर स्तर पर भी जारी रखा। उन्होंने 2021 विश्व चैंपियनशिप में एकल में कांस्य, थॉमस कप 2022 में पुरुष टीम के साथ स्वर्ण और थॉमस कप 2026 में पुरुष टीम के साथ कांस्य पदक जीता था। लक्ष्य ने 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल में स्वर्ण पदक और मिश्रित टीम के साथ रजत पदक जीता था।
एशियन गेम्स 2022 में रजत पदक, एशिया मिश्रित टीम चैंपियनशिप में मिश्रित टीम के साथ कांस्य पदक, एशिया टीम चैंपियनशिप 2020 में कांस्य पदक उनके नाम दर्ज है। लक्ष्य सेन को 30 नवंबर, 2022 को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। लक्ष्य महज 25 साल के हैं। पेरिस ओलंपिक में वह एकल में चौथे स्थान पर रहे थे। खेल के प्रति उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए बैडमिंटन में उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीद है।

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