जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के बाईपास निर्माण से प्रभावित परिवारों ने अपने आवास ध्वस्त होने के बाद सिर छिपाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई है। प्रभावितों का कहना है कि मकान टूटने के बाद वे बेघर हो गए हैं और उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है। ऐसे में बाईपास क्षेत्र से हटकर बची खाली भूमि पर टिन शेड अथवा कच्चे आवास बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
शनिवार को पार्षद अनिल रावत के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों ने तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी संदीप कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में बताया गया कि नगर निगम क्षेत्र के विशनपुर इलाके में रहने वाले अनेक परिवार राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के बाईपास निर्माण की जद में आए हैं। परियोजना के तहत उनके मकानों को खाली कराया गया और कई भवन ध्वस्त भी हो चुके हैं, जिससे परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावितों ने कहा कि बाईपास मार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि के अतिरिक्त आसपास कुछ खाली भूमि अभी भी उपलब्ध है। वे इसी भूमि पर अस्थायी रूप से टिन शेड या कच्चे मकान बनाकर अपने परिवारों के साथ रहना चाहते हैं, ताकि उनके सिर पर छत बनी रहे। उनका कहना है कि मकान टूटने के बाद उनके पास रहने का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है और आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं है कि वे तुरंत कहीं और आवास की व्यवस्था कर सकें। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रभावित परिवारों ने अपनी जरूरत के अनुसार कुछ स्थानों पर अस्थायी टिन शेड और कच्चे ढांचे तैयार किए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें वहां से हटने का दबाव बनाया जा रहा है। लोगों ने मांग की कि जब तक उनके पुनर्वास अथवा स्थायी आवास की समुचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके टिन शेड और कच्चे मकानों को नहीं तोड़ा जाए तथा उन्हें अस्थायी रूप से वहां रहने की अनुमति दी जाए। प्रभावितों ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए वे सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उनके पुनर्वास और आवासीय सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार और प्रशासन को सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मानवीय आधार पर उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। इस अवसर पर प्रेम सिंह, वीरेंद्र सिंह, संदीप, कमला देवी, सोनिका देवी, सरोजनी देवी, पार्वती देवी, दीपक रावत सहित कई प्रभावित परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।