नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस में असली पार्टी को लेकर चल रहे विवाद पर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने तय समय पर जवाब दे दिया था, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी गुट दो बार समय बढ़ाने के बाद भी अपना पक्ष नहीं रख सका।
तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में असली पार्टी को लेकर चल रहे विवाद के बीच पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जांच जल्द पूरी करने की मांग की है। उन्होंने आयोग को नया पत्र भेजकर कहा कि उनके गुट ने तय समय के भीतर अपना जवाब दे दिया था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को दो बार समय बढ़ाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया। ममता बनर्जी ने आग्रह किया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि चुनाव आयोग ने उनके गुट को 6 जुलाई 2026 तक जवाब देने का समय दिया था और उन्होंने समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रख दिया। इसके बाद आयोग ने प्रतिद्वंद्वी गुट को पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक का अतिरिक्त समय दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि दो बार समय बढ़ाने के बाद भी यदि कोई जवाब नहीं आया है तो यह माना जा सकता है कि उनके 6 जुलाई के पत्र में दिए गए सभी तथ्यों और दलीलों का प्रतिद्वंद्वी गुट के पास कोई जवाब नहीं है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त समय मिलने का इस्तेमाल ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगी अपने पक्ष को मजबूत दिखाने के लिए कथित तौर पर नए और गलत साक्ष्य तैयार करने में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने पहले ही प्रतिद्वंद्वी पक्ष के आरोपों का मजबूती से खंडन किया है और उन आरोपों में कोई दम नहीं है। इसलिए अब उन्हें और समय देना उचित नहीं होगा। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि दोनों पक्षों के लिए समान अवसर होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि 25 जुलाई के बाद प्रतिद्वंद्वी गुट को कोई और समय नहीं दिया जाए। उनके अनुसार, मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा है और इसमें जल्द फैसला होना जरूरी है। उन्होंने पत्र में कहा कि न्याय तभी प्रभावी माना जाएगा, जब लोगों का उस पर भरोसा बना रहे। यदि बार-बार समय बढ़ाया जाएगा तो उस भरोसे पर असर पड़ेगा।
यह विवाद 2 जुलाई को चुनाव आयोग के पास पहुंचा, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का “वास्तविक” संगठन बताते हुए आयोग से मान्यता देने की मांग की। इस गुट का दावा है कि 22 जून को आयोजित विशेष बैठक में संगठनात्मक बदलाव किए गए थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों को पत्र भेजकर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब मांगा था। ममता बनर्जी गुट ने समय पर जवाब दाखिल कर दिया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक समय मांगा।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने जवाब में प्रतिद्वंद्वी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज किया। गुट ने कहा कि एआईटीसी के संविधान के अनुसार पार्टी की सभी संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं। उन्होंने बताया कि आखिरी संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। इसलिए यह दावा कि समितियों का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से सही नहीं है।