भाषाओं के समन्वय से शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के प्रसार को मिलेगी गति

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श्रीनगर गढ़वाल : गढ़वाल विवि के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में आयोजित यूजीसी के पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के तहत भारतीय भाषाओं की समरसता व बहुलता का स्वरूप, विषय पर व्याख्यान आयोजित हुए। वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम के आठवें दिन प्रथम सत्र में शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के सीनियर एक्सपर्ट प्रो. आरएस सर्राजू ने भारतीय भाषा परिवार, भाषाओं के ऐतिहासिक विकास और समान पारिभाषिक शब्दावली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के समन्वय से शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के प्रसार को नई गति मिलेगी। द्वितीय सत्र में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संजीव चौहान ने गुरु गोविंद सिंह विरचित दशम ग्रंथ में भारत-बोध विषय पर व्याख्यान देते हुए भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रभाव और मानवीय मूल्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का साहित्य देश की ऐतिहासिक स्मृति और सांस्कृतिक अस्मिता का सशक्त दस्तावेज है। तृतीय सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों की माइक्रोटीचिंग का मूल्यांकन किया गया। प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने प्रभावी अध्यापन, समय-प्रबंधन और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धति पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। चतुर्थ सत्र में उत्तराखंड की पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. सविता मोहन ने संस्कृति के संरक्षण में भारतीय भाषाओं का योगदान विषय पर कहा कि भारतीय भाषाएं लोकज्ञान, लोकसाहित्य और सांस्कृतिक विरासत की सबसे सशक्त संवाहक हैं तथा इनके संरक्षण से भारतीय संस्कृति की निरंतरता सुरक्षित रहती है। (एजेंसी)

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