केरल में कर्नाटक के दबंगों पर कोर्ट की सख्ती: पीड़ित परिवार के घर में घुसने पर लगाई रोक, कोर्ट ने कहा- सुरक्षा सर्वोपरि

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प्तसुल्तान बाथेरी मुंसिफ कोर्ट ने परिवार की सुरक्षा के लिए जारी किया अंतरिम आदेश
वायनाड, सुल्तान बाथेरी के मुंसिफ कोर्ट ने कथित रूप से जबरन घर में घुसने, गाली-गलौज करने और एक स्थानीय परिवार को डराने-धमकाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए कर्नाटक के रहने वाले एक रसूखदार आरोपी और उसके गुर्गों के पीड़ित के घर में प्रवेश करने पर पूरी तरह से अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश मणिचेरा (पूमाला) की रहने वाली शाइमोल जोस की याचिका पर कोर्ट ने जारी किया है। शाइमोल ने अपने परिवार और अपनी गोद में मौजूद महज 6 महीने के मासूम शिशु की जान माल की सुरक्षा के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। अदालत में दायर याचिका के मुताबिक, यह पूरा मामला शाइमोल जोस के दामाद डॉ. भार्गव मल्लप्पा से जुड़े किसी वित्तीय और व्यावसायिक लेन-देन के बाद शुरू हुआ। दामाद के बिजनेस विवाद का बदला लेने के लिए आरोपियों ने केरल में रह रहे उनके सास-ससुर के घर को निशाना बना डाला। याचिका में कहा गया है कि 20 जून 2026 को सुबह करीब 8:10 बजे चित्रदुर्ग (कर्नाटक) निवासी मैलारास्वामी, बी.पी. सुरेश और दो अन्य अज्ञात लोगों के साथ उनके घर पहुंचा। आरोप है कि उन्होंने परिसर में जबरन प्रवेश किया, मुख्य दरवाजा जोर-जोर से पीटा और घर के अंदर घुसने की कोशिश की। जब परिवार के सदस्यों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी आरोपियों को वहां से हटाया। परिवार ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं और डॉ. भार्गव मल्लप्पा के मोबाइल फोन तक गैरकानूनी तरीके से पहुंचने की भी कोशिश की गई। इस संबंध में सुल्तान बाथेरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में पेश किए गए गवाहों और पुलिस डायरी के तथ्यों को देखने के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी पूरी तरह कसूरवार नजर आ रहे हैं और इस वक्त पीड़ित परिवार की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके बाद अदालत ने मैलारास्वामी, उसके सहयोगियों और एजेंटों को अगली सुनवाई तक परिवार की संपत्ति में प्रवेश करने या किसी भी तरह से उनकी शांति और सुरक्षा में हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी।

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