जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : उत्तराखंड के मूलनिवासी शिल्पकार समाज की समस्याओं को लेकर शैलशिल्पी विकास संगठन ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि राज्य का शिल्पकार समाज लंबे समय से आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और सामाजिक उपेक्षा का सामना कर रहा है, जिससे उनकी पारंपरिक कला और संस्कृति भी प्रभावित हो रही है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर कहा कि शिल्पकार समाज ने सदियों से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पारंपरिक शिल्पों को जीवित रखा है। बावजूद इसके आज यह समुदाय भूमिहीनता और रोजगार की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं और बाजार की कमी के कारण नई पीढ़ी पारंपरिक व्यवसायों से दूरी बना रही है। संगठन ने मांग की कि भूमिहीन परिवारों के लिए विशेष आवास और भूमि योजना शुरू की जाए। साथ ही पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं, ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए और शिल्प उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने, पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने तथा जातीय उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो उत्तराखंड की पारंपरिक शिल्प कला और सांस्कृतिक विरासत को बड़ा नुकसान हो सकता है।