कोटद्वार-पौड़ी

बजट से पहले पीएम से मांग, अंतिम आहरित वेतन का 67 फीसदी हिस्सा बतौर पेंशन मिले, कर मुक्त हो ओपीएस

Spread the love
Backup_of_Backup_of_add

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार, एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने की तैयारियों में जुटी है। इससे पहले केंद्रीय कर्मियों और रिटायर्ड लोगों ने भी अपनी मांगें, सरकार तक पहुंचा दी हैं। सेवारत कर्मी, पुरानी पेंशन बहाली के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो पेंशनर्स ने भी अपनी मांगें सरकार के समक्ष रख दी हैं। ‘भारत पेंशनर समाज’ (बीपीएस) के महासचिव एससी महेश्वरी ने इस बाबत 12 जनवरी को प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और डीओपीटी मंत्री को पत्र भेजकर उनके समक्ष अपनी मांगें रख दी हैं। इनमें पुरानी पेंशन को बढ़ाने की मांग भी शामिल है।
मौजूदा समय में केंद्रीय कर्मियों को रिटायरमेंट के बाद उनके अंतिम आहरित वेतन का 50 फीसदी हिस्सा बतौर पेंशन मिलता है। इस हिस्से को 50 से बढ़ाकर 67 फीसदी करने की मांग की गई है। साथ ही ओपीएस पर कोई टैक्स भी नहीं होना चाहिए। साथ ही ‘भारत पेंशनर समाज’ ने पेंशन व्यवस्था में केंद्रीय वेतन आयोग (5वें सीपीसी) को सहयोग देने वाली टाटा इकोनॉमिक कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीईसीएस) की सिफारिशें लागू करने की मांग की है।
‘भारत पेंशनर समाज’ (बीपीएस) के महासचिव एससी महेश्वरी ने अपने पत्र में कहा है, नीति निर्माताओं के लिए वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन योजना और संबंधित वित्तीय नीतियों को संशोधित करने की दिशा में सचेत कदम उठाना अनिवार्य है। ये परिवर्तन केवल संख्या और प्रतिशत के बारे में नहीं है। इनके जरिए रिटायर्ड लोगों की गरिमा को बनाए रखने, उनका आराम सुनिश्चित करने और उस पीढ़ी के योगदान को पहचानने के बारे में हैं, जिसने हमारे समाज को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया है। अब वह समय आ गया है, जब सरकार को ऐसे कई लोगों के अंतिम वर्षों में उनकी सुरक्षा और संतुष्टि को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
बतौर एससी महेश्वरी, आर्थिक अनिश्चितताएं अक्सर सेवानिवृत्ति के सुनहरे वर्षों पर हावी हो जाती हैं। रिटायर्ड लोगों को अपर्याप्त पेंशन से जूझना पड़ता है। इस मामले में केंद्र सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए।
पांचवें केंद्रीय वेतन आयोग (5वें सीपीसी) के लिए टाटा इकोनॉमिक कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीईसीएस) ने मौजूदा पेंशन प्रणाली में कई तरह की गंभीर कमियों को उजागर किया था। इसके साथ ही डीएस नकारा बनाम भारत सरकार, के एक केस में सुप्रीम कोर्ट की एतिहासिक घोषणा में भी पेंशन प्रणाली की एक गंभीर कमी सामने आई थी। उस पर अभी तक कोई काम नहीं हो सका है। इस मुद्दे की जड़ पेंशन की घटती क्रय शक्ति में निहित है। समय के साथ, मुद्रास्फीति, भोजन और चिकित्सा देखभाल जैसी आवश्यक चीजों की बढ़ती लागत, पेंशन के मूल्य को लगातार कम कर देती है। यह घटना कई सेवानिवृत्त लोगों को वित्तीय दलदल में फंसा देती है। इससे उनके लिए उस जीवन स्तर को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिसके वे नियोजित होने के दौरान आदी थे।
टीईसीएस ने 5वें सीपीसी के साथ अपने परामर्श में कहा था कि एक सेवानिवृत्त व्यक्ति को अपने सेवानिवृत्ति-पूर्व के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए उसके अंतिम आहरित वेतन का 67 फीसदी बतौर पेंशन मिलना आवश्यक है। वर्तमान में जो पेंशन मिल रही है, वह अंतिम आहरित वेतन का केवल 50 फीसदी है। यह अंतर केवल एक आंकड़ा नहीं है। इसके माध्यम से अनगिनत वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में एक ठोस गिरावट का पता चलता है। एक अन्य पहलू, जो इस खराब स्थिति को बढ़ा देता है, वह है पेंशन पर कराधान। यानी पेंशन पर टैक्स लगता है। वृद्धावस्था के लिए आयकर में राहत मौजूद है, लेकिन यह मुद्रास्फीति के कारण बढ़ती खाई को पाटने में अपर्याप्त है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय को एसटीएच सीपीसी की सिफारिशों, विशेष रूप से पैरा 167.11 पर पुनर्विचार करने की तत्काल आवश्यकता है। महंगाई राहत (डीआर) और निश्चित चिकित्सा भत्ता (एफएमए) के साथ पेंशन को आयकर छूट देने से महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।
‘भारत पेंशनर समाज’ ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और डीओपीटी मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि के लिए ब्याज दरों को संशोधित करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान में जमा राशि पर 0.25% से 0.50% की मानक दर और 2% अधिक का संशोधन, प्रभावी ढंग से उनकी बचत के खरीद मूल्य में गिरावट का प्रतिकार कर सकता है। इसके अलावा, बैंकों और डाकघरों में वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि के लिए व्यापक बीमा कवरेज का विस्तार एक अतिरिक्त सुरक्षा जाल प्रदान करेगा। इससे वरिष्ठ लोगों की अधिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यानी वरिष्ठ नागरिकों की बचत का बीमा होना चाहिए। कई दफा बैंक पर ताला लगने या दूसरी किसी समस्या के चलते वरिष्ठ नागरिकों की बचत, जोखिम में आ जाती है। इससे बचाव के लिए उनकी जमा राशि का बीमा होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!