गंगा की सहायक नदियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट रोकें : डीएम

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गंगा में बिना शोधन का सीवेज प्रवाहित न हो, सेप्टिक टैंक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर
जयन्त प्रतिनिधि।
चमोली : जनपद में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, स्वच्छता, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों की समीक्षा हेतु जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को जिला सभागार गोपेश्वर में जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े सभी विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा क्षमता एवं आवश्यकता के बीच मौजूद अंतर को समाप्त करने के लिए नए एसटीपी स्थापित किए जाने संबंधी डीपीआर शीघ्र तैयार करने तथा आवश्यक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जनपद के सभी एसटीपी नियमित रूप से सुचारु रूप से संचालित रहें तथा उनकी कार्यक्षमता पर निरंतर निगरानी रखी जाए। उन्होंने ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रभावी संचालन एवं एसटीपी की स्वयं निगरानी के लिए आवश्यक सभी स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे अविलंब स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही जनपद के गंगा तट पर बसे सभी प्रमुख नगरों एवं बाजारों को चरणबद्ध तरीके से सीवरेज नेटवर्क एवं एसटीपी से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा, ताकि बिना शोधन के किसी भी प्रकार का सीवेज गंगा अथवा उसकी सहायक नदियों में प्रवाहित न हो। जिलाधिकारी ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर देते हुए सभी अधिशासी अधिकारियों एवं अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण एवं वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने सभी अर्बन लोकल बॉडी के अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक मात्रा में ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों की पहचान कर उनके लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में गंगा की सहायक नदियों को स्वच्छ बनाए रखने पर विशेष बल देते हुए जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता सिंचाई को निर्देश दिए कि गंगा में मिलने वाली सभी सहायक नदियों एवं नालों का सर्वे कराया जाए तथा मुख्य धारा में प्लास्टिक एवं अन्य ठोस अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक स्थानों पर चेकडैम, जाल एवं अन्य प्रभावी संरचनाएं विकसित की जाएं, जिससे प्रदूषण को स्रोत स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत तेज सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

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