डाक्टरों के अभाव में खुद बीमार है ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सालय

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रुद्रप्रयाग। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने आयुर्वेदिक व आयुष विग चिकित्सालयों की स्थापना तो की, लेकिन वर्तमान में डक्टरों के अभाव में यह चिकित्सालय खुद बीमार चल रहे हैं। जिले में कुल स्वीत 48 पदों के सापेक्ष 29 डक्टरों के पद रिक्त चल रहे है। जिससे अधिकांश चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित होने से गरीब जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रुद्रप्रयाग जनपद में स्थापनाकाल से ही हमेशा अधिकारी, कर्मचारी के साथ ही डाक्टरों की कमी रही है। हालांकि समय-समय पर सरकारों की ओर से पहाड़ी जिलों के लिए डाक्टरों के तैनाती के आदेश तो होते है, लेकिन यह डक्टर ज्वाइनिग के बाद फिर पुनरू लौटकर नहीं आते है। इससे पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ता है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए सरकारों की ओर से 33 आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं 12 आयुषविग की स्थापना की गई है। जिले के 33 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में डक्टरों के कुल 36 पदों की स्वीति है, जिनमें से 16 पदों पर ही डक्टर तैनात है, जबकि 20 डक्टर के पद पिछले लंबे समय से रिक्त चल रहे है। इसके अलावा स्वीत 35 फार्मासिस्टों में मात्र 6 पद ही रिक्त चल रहे है। इसी प्रकार आयुषविंग चिकित्सालय में स्वीत 12 डाक्टरों में से 3 पदों पर ही डाक्टर तैनात है। जबकि 9 डाक्टरों के पद वर्तमान में रिक्त चल रहे है। इसके अलावा स्वीत 12 फार्मासिस्टों के पदों पर फार्मासिस्ट तैनात है। जिले में उक्त दोनों चिकित्सालयों में 29 डक्टरों के पद रिक्त होने से यहां फार्मासिस्ट ही पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डक्टरों की कमी के चलते गांव की जनता को एक छोटी सी बीमारी के लिए जिला चिकित्सालय के साथ ही बेस चिकित्सालय श्रीनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है। हालांकि पैसे वाले तो महंगे चिकित्सालयों का रुख कर रहे है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की गरीब तबके की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके अतिरिक्त चिकित्सालयों में लगभग पचास फीसदी भवन ही विभाग के अपने है, जबकि शेष पचास फीसदी भवन किराए के साथ ही जैसे तैसे संचालित हो रहे है। विभाग की ओर से समय पर डक्टर एवं भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव तो भेजे जाते है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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