वन पंचायतों में गैर काष्ठीय वन उपज और हर्बल पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर

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अल्मोड़ा। जनपद की वन पंचायतों में गैर काष्ठीय वन उपज के विकास तथा हर्बल एवं अरोमा पर्यटन परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने संबंधित विभागों को क्लस्टर आधारित मॉडल पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जाएं। मंगलवार को आयोजित क्लस्टर स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि वन पंचायतों का चयन और गतिविधियों का संचालन ऐसी योजना के तहत किया जाए, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और अधिकतम लोगों को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध वन संपदा तथा औषधीय एवं सगंध पौधों की प्रचुरता को स्थानीय आर्थिक विकास से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजना को परिणामोन्मुख और जनहितकारी बनाना होगा। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने और उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि गैर काष्ठीय वन उपज विकास तथा हर्बल एवं अरोमा पर्यटन परियोजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य वन पंचायतों में औषधीय और सगंध पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना वर्ष 2023-24 से शुरू की गई है और वर्ष 2033-34 तक संचालित रहेगी। योजना केवल वन पंचायतों में लागू होगी, जहां विभिन्न विभाग तकनीकी और अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। परियोजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों का संचालन स्थानीय समुदाय और वन पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल सकेगा। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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