देहरादून। उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत एमबीबीएस दाखिले से जुड़े कथित प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े की जांच अब तहसील प्रशासन और राजस्व अभिलेखों तक पहुंच गई है। मामले में चार एमबीबीएस दाखिले निरस्त किए जा चुके हैं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र हासिल करने के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज हुई है। इसी बीच मामले को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने एसडीएम सदर देहरादून कार्यालय की प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर दावे किए हैं।
बहुगुणा का दावा है कि अगस्त से लेकर एमबीबीएस सीट आवंटन से ठीक पहले तक एसडीएम सदर कार्यालय से करीब 50 संदिग्ध/फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किए गए। उनका आरोप है कि इन स्थायी निवास प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हासिल करने में किया गया।
हालांकि, 50 प्रमाण पत्र जारी होने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इस दावे की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पहले चार एमबीबीएस दाखिलों पर हो चुका है बड़ा एक्शन
मामले में प्रशासनिक जांच के दौरान चार अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए थे। जांच में सामने आया कि चारों आवेदनों में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र लगाया गया था, जबकि संबंधित सरकारी पंजिका में इस नाम का रिकॉर्ड नहीं मिला।
इसके अलावा आवेदन में दर्ज पतों पर स्थलीय सत्यापन के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों अथवा उनके परिवार के निवास की पुष्टि भी नहीं हुई। प्रशासन की जांच के बाद चारों प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और इसके आधार पर हुए चार एमबीबीएस दाखिले भी रद्द कर दिए गए।
एसडीएम कार्यालय पहुंची एसआईटी, रिकॉर्ड कब्जे में लिए
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा अब प्रमाणपत्र हासिल करने वाले आवेदकों तक सीमित नहीं है। एसआईटी ने एसडीएम सदर कार्यालय पहुंचकर प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित फाइलों और राजस्व अभिलेखों की पड़ताल की तथा कई दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच टीम ने प्रमाणपत्रों के सत्यापन से जुड़े तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों से भी जानकारी जुटाई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आवेदन से लेकर सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी होने तक पूरी प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर जांच हुई और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया गया।
14 प्रमाणपत्रों की सूची मुख्यमंत्री
को सौंपने का दावा
प्रदीप बहुगुणा का दावा है कि 14 संदिग्ध स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की सूची मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी जा चुकी है। उनका कहना है कि जल्द ही करीब 50 प्रमाणपत्रों से संबंधित पूरी सूची सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
बहुगुणा ने एसडीएम सदर कार्यालय से जारी प्रमाणपत्रों की स्वतंत्र जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर आगे किन-किन सरकारी प्रमाणपत्रों अथवा सुविधाओं का लाभ लिया गया।
जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
मामले की मौजूदा जांच में केवल एमबीबीएस प्रवेश से जुड़े दस्तावेज ही नहीं, बल्कि प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी सरकारी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। एसआईटी द्वारा एसडीएम और एडीएम कार्यालय से संबंधित पत्रावलियां लिए जाने से यह स्पष्ट है कि जांच एजेंसी प्रमाणपत्रों के स्रोत और उनके सत्यापन की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही है।
यदि 50 स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने संबंधी दावा जांच में सही पाया जाता है, तो जांच का दायरा केवल एमबीबीएस प्रवेश तक सीमित न रहकर उन अन्य सरकारी योजनाओं, नौकरियों, शैक्षणिक प्रवेशों और आरक्षण आधारित लाभों तक भी पहुंच सकता है, जिनमें स्थायी निवास प्रमाण पत्र पात्रता के दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल होता है।