दुगड्डा के सरडा गांव में फिर दिखा गुलदार, दहशत में ग्रामीण

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ग्रामीणों ने वन विभाग से की गुलदार को पकड़ने की मांग
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
दुगड्डा ब्लाक के सरडा सकाली गांव में शुक्रवार देर रात को गुलदार आ धमका, गुलदार के धमकने ने से पूरा गांव दहशत के साए में जीने को मजबूर है, ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में पिंजरा लगाने की मांग की।
बता दें कि दुगड्डा ब्लॉक के सरडा सकाली गांव मे बुधवार 10 मार्च को रात 8 बजे के लगभग गुलदार 4 वर्षीय मयंक को घर के अंदर से खींच कर झाड़ियों में ले गया था, तब मासूम के चाचा मुकेश ने घर से 50 मीटर दूर गुलदार के ऊपर कूदकर उसकी जान बचाई थी। मयंक का राजकीय बेस अस्पताल में उपचार चल रहा है। शुक्रवार देर रात को गुलदार दोबारा से गांव में देखा गया, जिसके बाद गांव के लोग अब दहशत के साये में जीने को मजबूर है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव के आसपास की झाड़ी कटवाने और गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। जिससे कि ग्रामीणों को गुलदार की दहशत से निजात मिल पाये।
सरड़ा निवासी वीरेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि बीती रात गुलदार सुरेन्द्र सिंह के आंगन में घुस गया। सुरेन्द्र सिंह ने तीन बार गुलदार को भगाने के लिए शोर मचाया और पटाखे फोड़े, लेकिन गुलदार आंगन में ही बैठा रहा। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी गांव पहुंचे और डेढ़-दो घंटे तक गांव में गश्त की, लेकिन गुलदार कहीं भी दिखाई नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार आसपास के इलाकों में कई दिनों से देखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग की गुलदार को पकड़ने में लापरवाही बरत रहा है। इलाके में नाममात्र की गश्त की जा रही है। गुलदार की दस्तक से लोग दहशत में हैं। वहीं इस मामले में लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा भी लगाया जाएगा। गुलदार के हमले से जो बच्चा घायल हुआ है, उसके परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया की जा रही है।

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