पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में को खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण एक रोमांचक लेकिन सुरक्षित विमानन घटना सामने आई। दिल्ली से नैनीसैनी एयरपोर्ट पहुंच रही 42 सीटर विमान सेवा तेज हवा और प्रतिकूल मौसम के कारण निर्धारित समय पर लैंड नहीं कर सकी। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पायलट ने विमान का रुख बदल दिया, जिसके चलते विमान कुछ समय के लिए नेपाल की सीमा की ओर चला गया। करीब 15 मिनट तक मौसम सामान्य होने का इंतजार करने के बाद विमान को सुरक्षित नैनीसैनी एयरपोर्ट पर उतार लिया गया।
तेज हवाओं ने बढ़ाई चुनौती
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह दिल्ली से उड़ान भरकर पिथौरागढ़ पहुंचा विमान जैसे ही नैनीसैनी एयरपोर्ट के नजदीक पहुंचा, तभी मौसम अचानक बिगड़ गया। एयरपोर्ट क्षेत्र में तेज हवा, घने बादल और अस्थिर मौसम के कारण विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव नहीं हो पा रही थी।
स्थिति को देखते हुए पायलट ने जोखिम लेने के बजाय विमान को एयरपोर्ट से दूर सुरक्षित दिशा में मोड़ दिया। इस दौरान विमान नेपाल की सीमा की ओर चला गया और लगभग 15 मिनट तक हवा में चक्कर लगाता रहा, ताकि मौसम अनुकूल होने का इंतजार किया जा सके।
मौसम सुधरते ही सुरक्षित उतरा विमान
करीब 15 मिनट बाद मौसम में कुछ सुधार होने पर पायलट ने दोबारा लैंडिंग का प्रयास किया। इस बार विमान सफलतापूर्वक नैनीसैनी एयरपोर्ट के रनवे पर उतर गया। विमान में सवार 25 से अधिक यात्रियों ने सुरक्षित लैंडिंग के बाद राहत की सांस ली और पायलट की सूझबूझ व पेशेवर निर्णय की सराहना की।
देहरादून जाने वाली उड़ान रद्द
दिल्ली से आए इसी विमान को आगे देहरादून के लिए रवाना होना था। हालांकि एयरपोर्ट के आसपास लगातार तेज हवाएं चलती रहीं। लगभग 25 मिनट तक मौसम सामान्य होने का इंतजार किया गया, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर पिथौरागढ़ से देहरादून की उड़ान रद्द कर दी गई।
इस उड़ान में यात्रा करने वाले 15 से अधिक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री वापस लौट गए, जबकि कुछ ने टैक्सी और अन्य साधनों से सड़क मार्ग से अपनी यात्रा पूरी करने का फैसला किया।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने क्या कहा?
नैनीसैनी एयरपोर्ट के प्रबंधक संदीप यादव ने बताया कि एयरपोर्ट के आसपास तेज हवा और खराब मौसम के कारण विमान की लैंडिंग और टेकऑफ दोनों प्रभावित हुए। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पायलट ने विमान को कुछ समय के लिए सुरक्षित क्षेत्र में ले जाकर मौसम सामान्य होने का इंतजार किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विमानन संचालन में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया।