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हीमोफीलिया के इलाज में बेहद काम की है जेनेटिक टेस्टिंग

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नई दिल्ली,एजेंसी। हीमोफीलिया को पहचानने और उसके इलाज में मदद करने के लिए जेनेटिक टेस्टिंग एक महत्वपूर्ण उपकरण हो सकता है। लेकिन बहुत सारे लोग इसके बारे में जानते नहीं हैं कि जेनेटिक टेस्टिंग क्या है और इसे कैसे करवाया जाता है। इस लेख में हम हीमोफीलिया के जेनेटिक टेस्टिंग के बारे में जानकारी देंगे जो अस्पतालों में विशेषज्ञ द्वारा कराया जाता है।
हीमोफीलिया एक जेनेटिक रोग होता है जिसमें खून के थक्कों की कमी होती है। इस रोग में रक्तस्राव ज्यादा होता है, जो ज्यादातर पुरुषों को प्रभावित करता है। जेनेटिक रोग होने के कारण जेनेटिक टेस्टिंग इस रोग के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण इलाज का माध्यम हो सकता है। इस लेख में, हम जानेंगे कि हीमोफीलिया के लिए जेनेटिक टेस्टिंग से संबंधित डॉस और डोंट्स क्या हैं।
जेनेटिक टेस्टिंग रोगी के बच्चों के लिए जेनेटिक रिस्क का मूल्यांकन करने में मदद करता है और इससे उन्हें उचित उपचार योजना तैयार करने में मदद मिलती है। गर्भवती महिलाओं के लिए, जेनेटिक टेस्टिंग एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो इस बात का पता लगाने में मदद करता है
हीमोफीलिया के जेनेटिक टेस्टिंग से पता चलता है कि किस प्रकार की जेनेटिक विकारता के कारण रोगी को यह समस्या हो रही है। यह सुनिश्चित करता है कि सही उपचार उपलब्ध हो जाएगा और रोगी का उपचार समय पर शुरू हो सकेगा। इसके साथ ही, जेनेटिक टेस्टिंग के बाद रोगी को उपचार के बारे में समझाया जा सकता है।
रिस्क का अंदाजा लगाना: जीनेटिक टेस्टिंग से, व्यक्ति को यह पता चलता है कि उनके बच्चों में हेमोफिलिया का खतरा कितना है। इस बात को जानना महत्वपूर्ण है ताकि उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करने के लिए तैयारी हो सके।
जेनेटिक टेस्टिंग से हीमोफिलिया की जांच की जा सकती है। यह टेस्ट रक्त में विशिष्ट गैर संतुलित प्रोटीन के लिए जांच करता है, जो रक्त स्राव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जेनेटिक टेस्टिंग से यह भी पता चलता है कि रोग किस प्रकार के होते हैं और उनका इलाज कैसे किया जाना चाहिए।

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