उत्तरकाशी। बीती शुक्रवार देर रात में हर्षिल में भागीरथी नदी में बनी झील को चैनालाइज करने के लिए बनाया गया मार्ग नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बह गया। इससे पूरा पानी आवासीय बस्ती की ओर आने से गढ़वाल मंडल विकास निगम गेस्ट हाउस का एक टिनशेड बह गया। साथ ही हर्षिल थाना भवन सहित नदी से सटे आवासीय भवनों व सेब के बगीचों पर हो रहा भू-कटाव बड़ा खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर सेना कैंप की ओर मिट्टी का कटाव होने के कारण पेड़ गिरकर टूट रहे हैं।
ग्राम प्रधान हर्षिल सुचिता रौतेला, जयवीर नेगी ने बताया कि जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण इस वर्ष हर्षिल के अस्तित्व को खतरा हो गया है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष आई आपदा को 11 माह से अधिक हो गया है लेकिन वहां पर बनी झील को पूरी तरह खोला नहीं गया है।
विभाग की ओर से वहां पर कार्य के नाम पर नदी के बीच में मलबे का टीला एकत्रित कर नदी को चैनालाइज किया गया। साथ ही एक माह पूर्व वहां पर सुरक्षात्मक कार्य शुरू करवाने के लिए मजदूर तो भेजे गए लेकिन अभी तक किसी प्रकार का कार्य धरातल पर नहीं दिख रहा है। बीती शुक्रवार देर रात को नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी को चैनालाइज करने वाला मलबे का टीला बह गया।
इससे नदी का पूरा पानी आवासीय क्षेत्र की ओर आ गया। इस दौरान जीएमवीएन गेस्ट हाउस का एक टिनशेड बह गया तो अब नदी की तेज धार हर्षिल थाना भवन सहित आसपास के आवासीय भवन व बगीचों में कटाव कर रही है। जयवीर नेगी ने बताया कि दूसरी ओर नदी के जलस्तर बढ़ने के कारण भू-कटाव होने के कारण बड़े-बड़े पेड़ गिर रहे हैं। आने वाली बरसात में यह पेड़ नदी का प्रवाह रोक सकते हैं। इससे पूरे हर्षिल में यह बड़ी आपदा का रूप लेगी। कहा कि अगर जल्द ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते हैं तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।