सरकार ने संसद में कहा- देश में डेल्टा प्लस के 70 मामले मिले, 17,169 नमूनों में पाया गया डेल्टा वैरिएंट

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में अब तक कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट के 70 मामले पाए गए हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि अब तक कोरोना वायरस यानी सार्स-कोव-2 के 58,240 नमूनों का अनुक्रम और इनमें से 46,124 नमूनों का विश्लेषण किया गया है। इनमें से 17,169 नमूनों में डेल्टा वैरिएंट पाया गया है जिसे देश में दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
सिंह ने कहा कि 28 प्रयोगशालाओं के संगठन इनसाकाग द्वारा नमूनों की जीनोम अनुक्रमण किया गया है, जिसमें 23 जुलाई तक कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट के 70 मामले मिले हैं। डेल्टा वैरिएंट में बदलाव के बाद ही डेल्टा प्लस वैरिएंट बना है, हालांकि, डेल्टा की तरह यह ज्यादा संक्रामक नहीं है।
मंत्री ने बताया कि अल्फा वैरिएंट के 4,172, बीटा के 217 और गामा वैरिएंट का सिर्फ एक केस मिला है। महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस के सबसे ज्यादा 23 मामले मिले हैं, उसके बाद मध्य प्रदेश में 11, तमिलनाडु में 10, चंडीगढ़ में चार और केरल एवं कर्नाटक में इसके तीन-तीन मामले पाए गए हैं।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने सदन को लिखित उत्तर में बताया कि 26 जुलाई तक बिना फोटो पहचान पत्र वाले 3़8 लाख लोगों का टीकाकरण हुआ है। बिना फोटो पहचान पत्र के पात्र लाभार्थियों के टीकाकरण के लिए केंद्र ने जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि देश में जितने भी लोगों को टीका लगाया जाता है, उनका कोविन प्लेटफार्म पर पंजीकरण होता है।
पवार ने बताया कि कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रांतियों को तुरंत दूर किया जाता है। उन्होंने एक लिखित जवाब में कहा कि देश में टीकाकरण तेजी से चल रहा है। जनवरी में 2़35 लाख डोज प्रतिदिन लगाई जा रही थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 39़89 लाख प्रतिदिन हो गया है।
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सदन को बताया कि देश के 63 जिलों में एक भी ब्लड बैंक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में कुल 3,500 लाइसेंसधारी ब्लड बैंक हैं। मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय रक्त नीति के तहत देश के हर जिले में कम से कम एक लाइसेंसी ब्लड बैंक स्थापित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

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