डॉ. कुलदीप गौतम
मानवीय व्यवहार के लिए पूर्ववर्ती परंपराओं का अपना महत्व है और ऐसी परंपराएं जो सर्वहित में अनुकरणीय हो वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा है और इस ज्ञान परंपरा का वह खजाना प्राचीन भारत की पांडुलिपियों में छिपा हुआ है जो भारत के इतिहास को बदलने में सक्षम है। इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अधीन “ज्ञान भारतम् मिशन” की स्थापना की जिसके तहत पांडुलिपि विश्वास के माध्यम से भारत के ज्ञान सम्पदा को पुन: प्राप्त करना है। ज्ञान भारतम् मिशन भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने तथा इसके डिजिटाइज करने और प्रचारित करने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन को सफल बनाने हेतु केंद्र सरकार ने लगभग 500 करोड रुपए (2024-31) तक आवंटित किए गए हैं। इससे पूर्व भी वर्ष 2003 में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन प्रारंभ किया गया था, परंतु जन भागीदारी का अभाव उस समय था किंतु विशेषज्ञों और संस्थाओं के माध्यम से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन 2003 में कार्य किया गया था जो बाद में लगभग समाप्त हो गया। किंतु अब पुन: भारत सरकार ने ज्ञान भारतम् मिशन के लिए पुन: पहल की है। भारतीय ज्ञान परंपरा संपदा इसकी विशाल पांडुलिपि में परिलक्षित होती है। यह ग्रंथ दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य कला और आध्यात्मिकता जैसे विषयों की एक श्रृंखला में फैले हैं। ये कई लिपियों और भाषाओं में लिखे गए हैं और मंदिरों, मठों, जैन भंडारों, अभिलेखागार, पुस्तकालयों और निजी संग्रहो में सुरक्षित हैं। अत: ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों को सुरक्षित किया जाएगा। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके की पारंपरिक प्रथाओं का सम्मान करते हुए नाजुक और लुप्तप्राय ग्रंथों को वैज्ञानिक सटीकता के साथ संरक्षित किया जाए। ज्ञान भारतम् मिशन संविधान के अनुच्छेद 51 ए (एफ) के अनुरूप है जो हमारी मिश्रित संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना एक मौलिक कर्तव्य बनता है। यह मिशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का समर्थन करता है जो भारतीय ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक पाठ्यक्रम में शामिल करता है। अत: ज्ञान भारतम् भारत सरकार का एक ऐसा प्रकल्प है जो भारतीय संस्कृतियों को पुनर्जीवित करेगा।